Iran Inflation Report: ईरान की महंगाई पर अलग-अलग आंकड़े, अमेरिका और ईरान के दावों में फंसा पेच

Nura Basta7 August 20262 min read59 viewsWorld
Iran Inflation Report: ईरान की महंगाई पर अलग-अलग आंकड़े, अमेरिका और ईरान के दावों में फंसा पेच

ईरान की गिरती आर्थिक स्थिति को लेकर इन दिनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा हो रही है। हाल ही में सऊदी मीडिया की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी ट्रेजरी सचिव ने ईरान की महंगाई दर 180 प्रतिशत तक पहुंचने की बात कही है। हालांकि, 7 अगस्त 2026 को इस तरह के किसी भी आधिकारिक बयान की पुष्टि नहीं हो पाई है। इसके विपरीत, हाल ही में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने 4 अगस्त और 7 अगस्त को मुख्य रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के साथ अन्य राजनयिक बातचीत पर अपना ध्यान केंद्रित रखा था।

महंगाई के आंकड़ों पर विरोधाभास

ईरान की महंगाई को लेकर अलग-अलग स्रोतों से अलग-अलग जानकारी सामने आ रही है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने 3 जून 2026 को सीनेट वित्त समिति के सामने गवाही दी थी, जिसमें उन्होंने ईरान की महंगाई दर 200 प्रतिशत से अधिक होने का अनुमान जताया था। इसके बाद 30 जुलाई 2026 को भी उन्होंने नए प्रतिबंधों के बाद ईरान में आर्थिक ठहराव और तीन अंकों वाली महंगाई का जिक्र किया था।

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दूसरी ओर, Statistical Center of Iran द्वारा जारी किए गए जुलाई 2026 के आधिकारिक आंकड़ों की स्थिति कुछ और ही कहानी बयां करती है। यहाँ दिए गए आंकड़ों को आप नीचे दी गई तालिका में देख सकते हैं:

CategoryJuly 2026 Rate
Point-to-point inflation87.9%
Annual inflation rate66%
Rural point-to-point inflation106.9%

आंकड़ों के अनुसार, जून में महंगाई दर 88.6 प्रतिशत थी, जो जुलाई में मामूली घटकर 87.9 प्रतिशत पर आ गई है। ग्रामीण इलाकों में महंगाई का असर शहरों की तुलना में अधिक दिखाई दे रहा है, जहां पॉइंट-टू-पॉइंट महंगाई 106.9 प्रतिशत तक दर्ज की गई है।

IMF का क्या है अनुमान

इस पूरे मामले पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का नजरिया भी महत्वपूर्ण है। अप्रैल 2026 के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद, IMF ने वर्ष 2026 के लिए ईरान की औसत उपभोक्ता मूल्य महंगाई दर 68.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। इन आंकड़ों में स्पष्ट है कि अमेरिकी आधिकारिक बयानों और ईरान के अपने सरकारी संस्थानों के बीच महंगाई दर को लेकर बड़ा अंतर है, जिसे लेकर वैश्विक स्तर पर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और वहां व्यापार करने वाले प्रवासियों के लिए इन आर्थिक आंकड़ों का सीधा संबंध क्षेत्र की स्थिरता और बाजार की गतिविधियों से जुड़ा होता है।

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