ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खमेनेई की मौत के बाद पश्चिम एशिया में स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई है। ईरान के अंतरिम नेतृत्व ने अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई को एक ‘गलत गणना’ बताया है। अंतरिम परिषद के सदस्य अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी ने अपने पहले संबोधन में साफ किया कि ईरान पीछे हटने वाला नहीं है। इसके जवाब में ईरानी सेना ने इजरायल पर अपनी सबसे ताकतवर मिसाइलों से हमला कर दिया है, जिसका असर खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और उड़ानों पर भी दिख रहा है।

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क्या है ईरान की जवाबी कार्रवाई और इजरायल का पलटवार?

ईरान की सेना IRGC ने इजरायल पर जवाबी हमलों की ‘दसवीं लहर’ शुरू कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें 2000 किलोमीटर रेंज वाली ‘खेबर’ बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया है। इन हमलों का मुख्य निशाना तेल अवीव में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कार्यालय और हाइफा में स्थित सैन्य केंद्र थे। पूर्वी यरूशलेम में भी कई जगहों पर धमाकों की खबर है।

दूसरी तरफ, इजरायल ने भी अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इजरायली सेना ने तेहरान में ईरान के खुफिया मंत्रालय के मुख्यालय पर सटीक हमला किया है। इस हमले में ईरान के वरिष्ठ खुफिया अधिकारी सैयद याह्या हमीदी और जासूसी विभाग के प्रमुख जलाल पौर हुसैन के मारे जाने की पुष्टि हुई है। अमेरिका और इजरायल मिलकर इस समय ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ चला रहे हैं।

भारत और खाड़ी देशों पर इस संघर्ष का क्या असर पड़ रहा है?

इस संघर्ष का असर अब आम लोगों की जेब और यात्रा पर पड़ने लगा है। ओमान की खाड़ी में एक टैंकर पर हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिससे शेयर बाजार नीचे गिर गए हैं। दुबई और अबू धाबी से यात्रा करने वाले लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। प्रमुख एयरलाइनों ने दो दिनों तक उड़ानें रोक दी थीं, हालांकि अब भारी सुरक्षा के बीच धीरे-धीरे सेवा बहाल की जा रही है।

भारत में भी इस घटना की गूंज सुनाई दे रही है। लखनऊ, दिल्ली और करगिल में बड़ी संख्या में लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया है। लोगों ने मोमबत्ती जलाकर अयातुल्लाह खमेनेई को श्रद्धांजलि दी और हमले की निंदा की है। पाकिस्तान और इराक में भी ऐसे ही प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं।

ईरान में अब कौन चला रहा है सरकार?

ईरान के संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत, सुप्रीम लीडर की अनुपस्थिति में एक ‘अंतरिम नेतृत्व परिषद’ देश का कामकाज संभाल रही है। इस परिषद में राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान, मुख्य न्यायाधीश गुलाम-हुसैन मोहसेनी-एजेई और अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी शामिल हैं। यह व्यवस्था तब तक रहेगी जब तक 88 सदस्यों वाली ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ नए स्थायी सुप्रीम लीडर का चुनाव नहीं कर लेती। सरकार ने देश में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टी का ऐलान किया है।