Iran Internal Conflict: ईरान की सरकार में मची भारी फूट, सेना और बातचीत करने वालों में टकराव, सुप्रीम लीडर तक पहुँचना हुआ मुश्किल

ईरान की सरकार के अंदर इस वक्त बड़ी उथल-पुथल मची हुई है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, वहाँ की सेना और बातचीत करने वाले नेताओं के बीच गहरी खाई बन गई है। हालात इतने खराब हैं कि किसी भी पक्ष का सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei से सीधा संपर्क नहीं हो पा रहा है। इस अंदरूनी लड़ाई की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान की स्थिति कमजोर होती दिख रही है।

ईरान के अंदर सत्ता की जंग और टकराव की क्या वजह है?

ईरान के अंदर इस समय सत्ता को लेकर बड़ी लड़ाई चल रही है। एक तरफ संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf हैं जो बातचीत के पक्ष में हैं, वहीं दूसरी तरफ IRGC कमांडर Major General Ahmad Vahidi की सेना है। इन दोनों गुटों के बीच भारी मतभेद हैं, जिसकी वजह से सरकार कोई एक फैसला नहीं ले पा रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी इस बात की पुष्टि की है कि ईरान की सरकार पूरी तरह टूट चुकी है। सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei काफी समय से जनता के सामने नहीं आए हैं। इस वजह से यह साफ नहीं हो पा रहा है कि वे खुद आदेश दे रहे हैं या उनके मातहत लोग अपनी मर्जी से फैसले ले रहे हैं।

अमेरिका के साथ बातचीत क्यों रुकी और क्या है ताजा अपडेट?

ईरान ने इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ होने वाले बातचीत के दूसरे दौर में शामिल होने से साफ मना कर दिया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका की मांगें बहुत ज्यादा और नामुमकिन हैं। साथ ही, ईरान चाहता है कि अमेरिका पहले उसके बंदरगाहों की नाकाबंदी खत्म करे।

खबरों के मुताबिक, Major General Ahmad Vahidi ही अब एकमात्र ऐसे अधिकारी हैं जिनकी सुप्रीम लीडर तक सीधी पहुँच है। इसी वजह से सेना का प्रभाव ज्यादा बढ़ गया है और बातचीत करने वाले नेताओं की बात नहीं सुनी जा रही है।

अमेरिका और पाकिस्तान का इस मामले में क्या रोल है?

अमेरिका ने फिलहाल ईरान पर हमला करने के अपने प्लान को अनिश्चित काल के लिए टाल दिया है। यह फैसला पाकिस्तान की लीडरशिप से मिले अनुरोध के बाद लिया गया। हालांकि, राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कर दिया है कि ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रहेगी।

वॉशिंगटन का मानना है कि ईरान के अंदर अभी कोई एक unified position या साझा राय नहीं बनी है। जब तक ईरान के अंदरूनी झगड़े खत्म नहीं होते और कोई एक जिम्मेदार चेहरा सामने नहीं आता, तब तक बातचीत आगे बढ़ना मुश्किल होगा।