Iran Internet Ban: ईरान में इंटरनेट बैन पर बड़ा सवाल, सरकारी दफ्तरों में चल रहे हैं सोशल मीडिया

ईरान के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट Mohammad Ja'far Qaempanah ने देश में चल रहे इंटरनेट बैन को लेकर अपनी ही सरकार से बड़ा सवाल पूछा है। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि आखिर क्यों बिना किसी ठोस वजह के इंटरनेट पर रोक लगाई जा रही है और सरकार में पारदर्शिता की भारी कमी है। इस बैन की वजह से देश के आम लोगों को बहुत परेशानी उठानी पड़ रही है और डिजिटल कारोबार पूरी तरह से चरमरा गया है।
छाया बाजार और वीपीएन का बड़ा कारोबार
वाइस प्रेसिडेंट ने जानकारी दी कि इंटरनेट पर पाबंदी लगने की वजह से देश में वीपीएन का एक अवैध बाजार यानी शैडो मार्केट खड़ा हो गया है। यह काला बाजार हर साल 7 से 12 ट्रिलियन तोमान का कारोबार कर रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि इस अवैध कारोबार से असल में किसे फायदा पहुंच रहा है। एक तरफ आम जनता इंटरनेट के लिए तरस रही है, वहीं दूसरी तरफ खुद सरकार के बड़े-बड़े दफ्तरों में पश्चिमी देशों के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है।
डिजिटल अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान
कम्युनिकेशंस मिनिस्टर Sattar Hashemi ने बताया कि इंटरनेट सेवाओं में बार-बार आ रही रुकावटों की वजह से देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को 67 ट्रिलियन तोमान से ज्यादा का सीधा नुकसान हो चुका है। नेटवर्क मॉनिटर करने वाली एजेंसियों जैसे IODA और Digiato के आंकड़ों के मुताबिक, देश के करीब 79% यूजर इंटरनेट की धीमी स्पीड से परेशान हैं। इंटरनेट ट्रैफिक सामान्य गति से घटकर सिर्फ 59% पर आ गया है, जिससे रोजमर्रा के काम भी रुक गए हैं।
सख्त नए नियम और विरोध
इस तकनीकी पाबंदी के बीच ईरानी संसद ने एक नया कानून पास किया है। इस नए कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति किसी भी विदेशी या विरोधी मीडिया को बिना अनुमति के इंटरव्यू देता है, तो उसे अधिकतम दो साल तक की जेल की सजा हो सकती है। हालांकि संसद के कुछ सदस्य जैसे Mostafa Pourdehghan का मानना है कि देश की सुरक्षा के लिए ये पाबंदियां बहुत जरूरी हैं। लेकिन इसके बावजूद आम जनता लगातार सरकार के इन फैसलों का विरोध कर रही है और देश में डिजिटल आइसोलेशन को लेकर लोगों में भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है।