ईरान में इंटरनेट की हालत बहुत खराब है। यहाँ पिछले 47 दिनों से इंटरनेट बंद है, जिससे आम लोग पूरी तरह डिजिटल दुनिया से कट चुके हैं। जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों और बाद में अमेरिका-इसराइल के साथ युद्ध की वजह से हालात और बिगड़ गए। अब तक कुल 1,104 घंटे हो चुके हैं जब आम जनता का बाहरी दुनिया से संपर्क टूटा रहा।
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इंटरनेट क्यों बंद हुआ और अब तक क्या स्थिति है?
इंटरनेट की यह समस्या जनवरी 2026 की शुरुआत में देश के अंदर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद शुरू हुई थी। 8 जनवरी 2026 को सरकार ने इंटरनेट और टेलीकम्यूनिकेशन सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया था। फरवरी के अंत में जब अमेरिका और इसराइल का ईरान के साथ युद्ध शुरू हुआ, तो ये पाबंदियाँ और भी सख्त कर दी गईं। 15 अप्रैल 2026 तक यह ब्लैकआउट 47 दिनों तक चला, जो किसी भी देश में अब तक का सबसे लंबा इंटरनेट शटडाउन माना जा रहा है।
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ा?
इस बंदी से ईरान की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा झटका लगा है। करीब 1 करोड़ लोग अपने रोजगार के लिए इंटरनेशनल इंटरनेट पर निर्भर थे, जिनका काम अब पूरी तरह रुक गया है। आर्थिक नुकसान का आंकड़ा काफी ज्यादा है और प्रेस की आजादी पर भी असर पड़ा है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुल समय | 1,104 घंटे |
| कुल दिन | 47 दिन |
| दैनिक प्रत्यक्ष लागत | 30-40 मिलियन डॉलर |
| दैनिक अप्रत्यक्ष लागत | 70-80 मिलियन डॉलर |
| प्रभावित लोग | 1 करोड़ नागरिक |
| बंदी की शुरुआत | 8 जनवरी 2026 |
| मुख्य कारण | विरोध प्रदर्शन और युद्ध |
सरकार और अधिकारियों का इस पर क्या कहना है?
ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने बाहरी दबाव और सैन्य हमलों की निंदा की है। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है लेकिन दबाव में नहीं आएगा। वहीं, ITGO के प्रमुख Ali Hakim-Javadi ने बताया कि कुछ बिजनेस को इंटरनेट वापस मिल गया है, लेकिन आम जनता के लिए कोई समय तय नहीं है क्योंकि देश में युद्ध जैसी स्थिति है। सरकार ने कुछ चुनिंदा लोगों को ‘white SIM cards’ दिए हैं ताकि वे सरकार की बातों को दुनिया तक पहुँचा सकें।
