ईरान में पिछले 52 दिनों से चल रहे सबसे लंबे इंटरनेट ब्लैकआउट के बीच अब कुछ बदलाव दिखे हैं. सरकार ने धीरे-धीरे कुछ खास लोगों के लिए इंटरनेट सेवा शुरू कर दी है. लेकिन आम नागरिकों के लिए पाबंदियां अब भी वैसी ही बनी हुई हैं. अमेरिका ने इस संचार ब्लैकआउट पर चिंता जताई है और इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया है.

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किसे मिला इंटरनेट और कौन अब भी परेशान है?

ईरानी सरकार ने यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों और रिसर्च करने वालों के लिए इंटरनेशनल इंटरनेट धीरे-धीरे चालू करने का फैसला किया है. इसके अलावा कुछ बिजनेस वालों को ‘प्रो इंटरनेट’ पैकेज दिए जा रहे हैं ताकि आर्थिक नुकसान को कम किया जा सके. लेकिन ईरान के करीब 90 मिलियन आम लोग अब भी पूरी दुनिया से कटे हुए हैं. डिजिटल राइट्स ग्रुप्स का कहना है कि इससे समाज में भेदभाव बढ़ेगा क्योंकि इंटरनेट अब केवल खास वर्ग तक सीमित हो गया है.

ब्लैकआउट से ईरान को कितना नुकसान हुआ?

इंटरनेट बंद होने से ईरान की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ा है. ऑनलाइन सामानों की बिक्री में 80 प्रतिशत की गिरावट आई है और शेयर बाजार को भी भारी नुकसान हुआ है. सुरक्षा कारणों से स्कूलों को अभी तक नहीं खोला गया है और बच्चों के लिए वर्चुअल लर्निंग अनिवार्य कर दी गई है.

विवरण असर या नुकसान
दैनिक सीधा खर्च 30 से 40 मिलियन डॉलर
कुल संभावित नुकसान 70 से 80 मिलियन डॉलर प्रतिदिन
ऑनलाइन सेल 80% तक गिरी
इंटरनेट कनेक्टिविटी सामान्य स्तर का मात्र 2%

सरकार ने इंटरनेट क्यों बंद रखा है?

ईरानी अधिकारियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए इंटरनेट बंद रखा है. संसद सदस्य फज़लोल्लाह रंजबर ने कहा कि पूरा इंटरनेट चालू करना देश के हित में नहीं होगा क्योंकि इससे नई समस्याएं पैदा हो सकती हैं. सरकार स्टारलिंक जैसे सैटेलाइट इंटरनेट को ब्लॉक कर रही है और घरों से डिश एंटीना जब्त किए जा रहे हैं. जो लोग VPN का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें सरकार की तरफ से गिरफ्तारी की चेतावनी वाले मैसेज भेजे गए हैं.

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.