ईरान ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खमनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। यह निमंत्रण ईरान के दूतावास ने 25 जून 2026 को भारत के विदेश मंत्रालय को औपचारिक तौर पर भेजा। इस मौके पर दुनिया के कई बड़े नेताओं को बुलाया गया है और इसे एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है।
जनाजे की तारीख और कार्यक्रम
जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खमनेई की मौत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इसराइल के हवाई हमले में हुई थी। उनके अंतिम संस्कार की रस्में 4 जुलाई से 9 जुलाई 2026 के बीच ईरान के अलग-अलग शहरों में होंगी। सबसे बड़ा जुलूस 6 जुलाई को तेहरान में निकलेगा और 9 जुलाई को मशहद में उनका दफन किया जाएगा। यह निमंत्रण ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन की तरफ से व्यक्तिगत रूप से भेजा गया है।
विशेषज्ञों की राय और सुझाव
पूर्व राजनयिक विद्या भूषण सोनी ने इस निमंत्रण को एक अच्छा संकेत बताया। उनका कहना है कि ईरान अब भी भारत को अपना एक जरूरी रणनीतिक साझेदार मानता है। सोनी ने कहा कि भारत का रुख इसराइल की तरफ पूरी तरह झुका हुआ नहीं दिखा, इसलिए ईरान ने भारत का सम्मान बनाए रखा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पीएम मोदी का खुद जाना जरूरी नहीं है, लेकिन भारत को एक उचित स्तर के प्रतिनिधिमंडल को भेजना चाहिए। उन्होंने चाबहार पोर्ट और ऊर्जा सुरक्षा के लिए ईरान के साथ रिश्तों को जरूरी बताया।
वहीं, पूर्व विदेश सचिव कंवल सिबल ने सलाह दी है कि भारत को एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधि भेजना चाहिए। उनके मुताबिक, ऐसा करने से ईरान को एक सकारात्मक राजनीतिक संदेश जाएगा और यह भी साफ होगा कि भारत विदेशी नेताओं की हत्या के खिलाफ है। पूर्व राजनयिक तलमीज अहमद ने कहा कि अगर पीएम मोदी का 6 जुलाई के आसपास किसी और देश का दौरा तय है, तो उनकी जगह उपराष्ट्रपति या विदेश मंत्री भी ईरान जा सकते हैं।
अन्य देशों की स्थिति और राजनीतिक प्रतिक्रिया
- पाकिस्तान: प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कन्फर्म किया है कि पाकिस्तान की तरफ से एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल जनाजे में शामिल होगा।
- अन्य देश: चीन, रूस और कतर के नेताओं को भी इस कार्यक्रम के लिए बुलाया गया है।
- AIMIM चीफ ओवैसी: उन्होंने पीएम मोदी से खुद जनाजे में शामिल होने की अपील की है ताकि भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का संदेश दुनिया तक पहुंचे।
वर्तमान स्थिति
भारत सरकार ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि उनकी तरफ से कौन इस कार्यक्रम में शामिल होगा। खबरों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी का 6 जुलाई से कई देशों का दौरा शुरू होने वाला है। यह मामला इसलिए ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि सुप्रीम लीडर की मौत हवाई हमले में हुई थी, जबकि 2024 में राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी के जनाजे में भारत के तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ शामिल हुए थे। हमले के बाद भारत ने पहले खामोशी साधी थी, जिसके बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ईरानी दूतावास में शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए थे।
