ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर एक बड़ी घोषणा की है. अधिकारियों ने जानकारी दी है कि उन्होंने समुद्री रास्तों के नए विकल्प खोज लिए हैं. यह कदम मुख्य रूप से समुद्र में बिछाई जाने वाली सुरंगों यानी सी माइन्स के खतरे को कम करने के लिए उठाया गया है. इस खबर के बाद खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

ईरान ने क्यों बदले समुद्री रास्ते और क्या है पूरा मामला?

IRGC की नौसेना के मुताबिक Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों में से एक है. यहां संभावित समुद्री सुरंगों का खतरा जहाजों की आवाजाही को प्रभावित कर सकता है. इसी जोखिम को कम करने के लिए वैकल्पिक रास्तों की पहचान की गई है. इन नए रूट की मदद से व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रूप से निकाला जा सकेगा. यह फैसला 8 अप्रैल 2026 को आधिकारिक तौर पर साझा किया गया है.

इस बदलाव से जुड़ी मुख्य बातें और प्रभाव

  • ईरान की IRGC नौसेना अब इन नए रास्तों की निगरानी करेगी.
  • इसका उद्देश्य समुद्र में संभावित हमलों या सुरंगों से जहाजों को बचाना है.
  • Strait of Hormuz से गुजरने वाले तेल के टैंकरों के लिए यह सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है.
  • भारत और खाड़ी देशों के बीच होने वाले समुद्री व्यापार पर इसका असर पड़ेगा.
  • प्रवासी भारतीयों के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में माल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है.

खाड़ी क्षेत्र और व्यापार पर इसका क्या असर होगा?

Strait of Hormuz के जरिए दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल और गैस प्राप्त करता है. अगर इस रास्ते में कोई भी रुकावट आती है, तो इसका असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों पर पड़ता है. ईरान के इस कदम को सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. फिलहाल इन रास्तों के इस्तेमाल के बारे में अधिक जानकारी आने वाले समय में स्पष्ट की जाएगी.

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.