ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका और इसराइल के इशारे पर काम करने वाले लोगों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया है. सुरक्षा बलों ने 32 लोगों को गिरफ्तार किया है जिन पर जासूसी और देश में अस्थिरता फैलाने का आरोप है. यह पूरी जानकारी IRNA न्यूज़ एजेंसी द्वारा साझा की गई है.
गिरफ्तार लोगों पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
IRGC इंटेलिजेंस ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, पकड़े गए 32 लोग अमेरिका और इसराइल के नेटवर्क से जुड़े हुए थे. इन लोगों पर कई गंभीर आरोप लगे हैं जैसे:
- रणनीतिक जगहों की संवेदनशील जानकारी इकट्ठा करना और उसे बाहर भेजना.
- देश के भीतर तोड़फोड़ और असुरक्षा पैदा करने की योजना बनाना.
- राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करना.
- आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होना और सुरक्षा वाहनों पर हमला करना.
- पुलिस अधिकारियों के साथ मारपीट और आगजनी जैसी वारदातों को अंजाम देना.
ईरान के अन्य प्रांतों में क्या कार्रवाई हुई?
18 मई 2026 को IRGC ने केवल इन 32 लोगों के अलावा कई अन्य जगहों पर भी गिरफ्तारियां कीं. माज़ंदरान प्रांत में जासूसी और तोड़फोड़ की साजिश रचने के आरोप में 69 एजेंटों को पकड़ा गया. इसके अलावा कज़विन में 2 और केर्मन प्रांत में 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिन्होंने सुरक्षा वाहनों पर हमला किया था. चहारमहल और बख्तियारी प्रांत में 22 ऐसे लोगों के नेटवर्क को खत्म किया गया जो सरकार विरोधी समूहों से जुड़े थे. वहीं, कुर्दिस्तान क्षेत्र के बानह में अमेरिका से आने वाले हथियारों और गोला-बारूद की एक बड़ी खेप को भी सुरक्षा बलों ने जब्त किया.
Frequently Asked Questions (FAQs)
IRGC ने किन लोगों को गिरफ्तार किया है?
IRGC ने अमेरिका और इसराइल के नेटवर्क से जुड़े 32 मुख्य संदिग्धों और अलग-अलग प्रांतों से कुल 100 से ज्यादा एजेंटों को गिरफ्तार किया है.
इन गिरफ्तारियों का मुख्य कारण क्या था?
इन लोगों पर ईरान के रणनीतिक स्थलों की जासूसी करने, तोड़फोड़ की योजना बनाने और विदेशी ताकतों के लिए काम करने का आरोप है.
