Iran Drone Attack: ईरान ने फिर गिराया अमेरिका का खतरनाक ड्रोन, हॉर्मोज़गन प्रांत के पर आसमान में हुई कार्रवाई.

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC एयरोस्पेस फोर्स ने दुनिया को चौंकाते हुए एक बड़ा ऐलान किया है। ईरान की तरफ से यह बताया गया कि उन्होंने 14 अगस्त 2026 को अमेरिका के एक बेहद खतरनाक MQ-9 ड्रोन को हवा में ही मार गिराया है। यह पूरी घटना ईरान के हॉर्मोज़गन प्रांत के ऊपर आसमान में घटी है। इस बात की जानकारी IRGC पब्लिक रिलेशंस ऑफिस और IRNA News Agency की तरफ से साझा की गई है। इस मिशन को पूरा करने के लिए ईरान ने अपने आधुनिक और उन्नत डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया जो उनके एयर डिफेंस नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। ईरानी अधिकारियों ने इस अमेरिकी विमान के पूरी तरह तबाह होने की पुष्टि की है लेकिन अमेरिका के रक्षा विभाग यानी पेंटागन ने इस नुकसान पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
अमेरिकी ड्रोन बेड़े को भारी नुकसान और वित्तीय घाटा
यह हालिया घटना अमेरिका के उस ड्रोन बेड़े के लिए एक और बड़ा झटका है जिसे इस चल रहे संघर्ष के दौरान पहले से ही भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सशस्त्र बलों ने इस संघर्ष की अवधि में अब तक कम से कम 45 MQ-9 Reaper ड्रोन गंवा दिए हैं। यह कुल अमेरिकी ड्रोन इन्वेंट्री का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा बनता है। अगर इन ड्रोनों की कीमत की बात की जाए तो बाजार में एक यूनिट की कीमत 30 मिलियन डॉलर से 50 मिलियन डॉलर के बीच है। इस हिसाब से अमेरिका को अब तक 1.3 बिलियन डॉलर से ज्यादा का वित्तीय नुकसान हो चुका है। सैन्य मामलों के जानकारों का यह मानना है कि MQ-9 ड्रोन की रफ्तार और उसकी सीमित ऊंचाई इस तरह के आधुनिक ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम के सामने उसे बहुत ज्यादा कमजोर बना देती है जिसके कारण ये आसानी से निशाना बन जाते हैं।
अमेरिकी रक्षा संसाधनों पर बढ़ा भारी दबाव
जैसे-जैसे यह संघर्ष आगे बढ़ रहा है, अमेरिका के पास मौजूद सैन्य संसाधनों पर भारी दबाव साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि अमेरिकी सेना के पास मौजूद प्राथमिक एयर डिफेंस इंटरसेप्टर और लंबी दूरी की मिसाइलों का स्टॉक लगभग 80 प्रतिशत तक खत्म हो चुका है। हथियारों की इस भारी कमी और लगातार बदल रहे युद्ध के हालातों को देखते हुए अमेरिकी रक्षा विभाग ने रक्षा कंपनियों को नए हथियार और आधुनिक गोला-बारूद बनाने का काम बहुत तेजी से करने का आदेश दिया है। इस पूरी स्थिति से यह साफ होता है कि इस लड़ाई का असर सिर्फ पैसों के नुकसान तक सीमित नहीं है बल्कि युद्ध के साजो-सामान की आपूर्ति पर भी इसका बहुत गहरा असर पड़ रहा है।