ईरान की Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने Strait of Hormuz में एक कमर्शियल कार्गो शिप पर मिसाइल दागी है. इस हमले से जहा़ज़ को नुकसान पहुँचा है और ईरान ने इस अहम समुद्री रास्ते को फिलहाल के लिए बंद कर दिया है. अमेरिका ने इस हरकत की कड़ी निंदा की है और ईरान से रास्ता तुरंत खोलने की मांग की है.
IRGC ने दावा किया है कि यह हमला सिर्फ एक चेतावनी थी. उनका कहना है कि कार्गो शिप ने तय शिपिंग रूट का पालन नहीं किया और कोर्स बदलने के आदेशों को नज़रअंदाज़ किया. इसी वजह से जहा़ज़ पर निशाना साधा गया.
डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने इस घटना पर सख्त रुख अपनाया है. अमेरिका ने ईरान से मांग की है कि वह दुनिया के सामने यह माने कि Strait of Hormuz खुला है और कमर्शियल जहा़ज़ों पर हमले बंद करे. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने सार्वजनिक तौर पर अपनी गलती नहीं मानी, तो उसके लिए परिणाम अच्छे नहीं होंगे.
खबरों के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी सलाहकारों को निजी तौर पर बताया है कि यह हमला उनके सिस्टम की खराबी या किसी कट्टरपंथी गुट की गलती थी, जो बातचीत को खराब करना चाहते थे. हालांकि, व्हाइट हाउस चाहता है कि ईरान इस बात को सबके सामने स्वीकार करे.
इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है. अमेरिका का कहना है कि ईरान ने तीन हफ्ते पहले हुए एक समझौते (MoU) का उल्लंघन किया है, जिसमें जहा़ज़ों की सुरक्षित आवाजाही का वादा था. वहीं ईरान का तर्क है कि समझौते की Article 5 उन्हें इस रास्ते के ट्रैफिक को मैनेज करने का अधिकार देती है.
तनाव कम करने के लिए ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ओमान के मस्कट पहुँचे हैं, जहाँ उनकी मुलाकात ओमान और कतर के अधिकारियों के साथ होगी. इस विवाद का सीधा असर समुद्री व्यापार पर पड़ा है. पिछले 24 घंटों में जहाँ सामान्य से बहुत कम सिर्फ 15 जहा़ज़ इस रास्ते से गुजरे हैं, वहीं करीब 285 जहा़ज़ अभी भी इंतज़ार कर रहे हैं.
दूसरी तरफ, IRGC कमांडर-इन-चीफ Brigadier General Ahmad Vahidi ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि ईरान अमेरिका और इसराइल की आक्रामकता का बदला लेगा. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका या उसके सहयोगी कोई जवाबी कार्रवाई करते हैं, तो ईरान भी बहुत कड़ा जवाब देगा और क्षेत्र में नए दुश्मन ठिकानों को निशाना बनाएगा.
