ईरान की IRGC Navy ने Strait of Hormuz से गुजरने वाले सभी जहाजों के लिए सख्त चेतावनी जारी की है। अब सभी समुद्री जहाजों को केवल उन्हीं रास्तों का इस्तेमाल करना होगा जिन्हें ईरान ने तय किया है। अगर कोई जहाज इन रास्तों से हटकर चलता है, तो ईरान की सेना उस पर कानूनी कार्रवाई कर सकती है।

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IRGC Navy ने 25 जून 2026 को यह आदेश दिया और साफ किया कि केवल ईरान द्वारा मंजूर किए गए रास्तों को ही सही माना जाएगा। जहाजों के लिए यह जरूरी कर दिया गया है कि वे अंतरराष्ट्रीय समुद्री चैनल 16 (Channel 16) के जरिए ईरान की सेना से संपर्क करें और तालमेल बिठाएं। बिना जानकारी या बिना तालमेल के नए रास्तों से जाने वाले जहाजों को खतरनाक माना जाएगा और उन्हें स्वीकार नहीं किया जाएगा।

पुराने आदेश और दावे

यह पहली बार नहीं है जब ईरान ने ऐसी चेतावनी दी हो। इससे पहले 31 मई 2026 को ईरान के Khatam al-Anbiya Central Headquarters ने भी सभी कमर्शियल जहाजों और तेल टैंकरों को तय रास्तों का पालन करने और IRGC Navy से अनुमति लेने को कहा था। साथ ही विदेशी सैन्य जहाजों को हस्तक्षेप न करने की चेतावनी दी गई थी।

बीते 20 जून 2026 को IRGC Navy ने दावा किया था कि अमेरिका द्वारा युद्धविराम के नियमों को तोड़ने और इसराइल के हमलों के कारण उन्होंने जलमार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया है। हालांकि, उस समय अमेरिकी अधिकारियों ने इस दावे को गलत बताया था और कहा था कि उन्हें जलमार्ग बंद होने का कोई सबूत नहीं मिला है।

विवाद की असली वजह

जानकारों का मानना है कि ईरान का यह सख्त रुख इसलिए है क्योंकि Oman ने International Maritime Organization (IMO) के साथ मिलकर जहाजों के लिए एक नया गलियारा (transit corridor) बनाने की कोशिश की थी। इसका मकसद जहाजों की आवाजाही को आसान बनाना था, लेकिन ईरान ने बिना अपनी सहमति के बनाए गए इन नए रास्तों का विरोध किया है।

ईरान के इस नए फरमान से अब समुद्र में तेल ले जाने वाले टैंकरों और इंश्योरेंस कंपनियों के लिए जोखिम बढ़ गया है। अब ईरानी नौसेना के पास उन जहाजों को रोकने या पकड़ने का अधिकार होगा जो उनके बताए रास्तों का पालन नहीं करेंगे।