इराक की जमीन का इस्तेमाल कर ईरान की Revolutionary Guard (IRGC) ने खाड़ी देशों के खिलाफ बड़ी साजिश रची है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने इराक के अंदर गुप्त नेटवर्क बनाए हैं ताकि सऊदी अरब, UAE और कुवैत जैसे देशों पर हमले किए जा सकें। इन हमलों का मुख्य मकसद उन देशों को निशाना बनाना है जहां अमेरिकी सेना के जवान तैनात हैं।

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ड्रोन हमलों की पूरी जानकारी

खबरों के अनुसार ये हमले 20 अप्रैल से 17 मई 2026 के बीच हुए। इराक के दक्षिणी शहरों Basra और Samawa के रेगिस्तानी इलाकों से कम से कम 7 ड्रोन दागे गए। ये ड्रोन सीधे तौर पर Kuwait, Saudi Arabia और UAE के ठिकानों की तरफ भेजे गए थे।

ईरान ने क्यों अपनाया यह तरीका

IRGC ने पुराने मिलिशिया ग्रुप्स के बजाय नए और छोटे गुप्त सेल बनाए हैं। ऐसा इसलिए किया गया ताकि हमलों के बाद ईरान अपनी जिम्मेदारी से बच सके और दुनिया को यकीन दिला सके कि इसमें उसका हाथ नहीं है। इराक के अधिकारियों ने बताया कि इससे अमेरिका का दबाव भी कम होगा और ईरान अपनी ताकत भी बनाए रखेगा।

सरकारों और अधिकारियों का क्या कहना है

  • Kuwait, Saudi Arabia और UAE: इन तीनों देशों ने इस मामले को लेकर इराक सरकार के सामने कड़ा विरोध जताया है।
  • इराक के प्रधानमंत्री: नए प्रधानमंत्री Ali Al-Zaydi ने वादा किया है कि वह इराक की जमीन का इस्तेमाल किसी भी पड़ोसी देश के खिलाफ नहीं होने देंगे।
  • US State Department: अमेरिका ने साफ कहा है कि इराक सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए ताकि ईरान के इन अस्थिर करने वाले नेटवर्क को खत्म किया जा सके।
  • विशेषज्ञ की राय: पूर्व सैन्य अधिकारी Jassim Al-Bahadli ने कहा कि ये नए ग्रुप छोटे हैं लेकिन ज्यादा कट्टर हैं और सीधे ईरान के कंट्रोल में काम कर रहे हैं।

कुछ समय पहले इराक के कुछ बड़े शिया गुटों ने अपनी बंदूकें छोड़ने और राजनीति में आने की बात कही थी। जानकारों का मानना है कि इसी वजह से ईरान ने अपने सीधे कंट्रोल वाले नए गुप्त ग्रुप्स तैयार किए।