ईरान की सेना के बड़े कमांडर ने हिज़्बुल्लाह को अपना पूरा समर्थन दिया है। उन्होंने साफ़ कहा कि उनका रेजिस्टेंस फ्रंट पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत है। इस बीच इसराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच तनाव और बढ़ गया है, जिससे पूरे इलाके में हलचल मची हुई है।

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ईरान और हिज़्बुल्लाह के बीच क्या रिश्ता है और कमांडर ने क्या कहा?

IRGC के कमांडर-इन-चीफ Ahmad Vahidi ने 27 अप्रैल 2026 को बयान दिया कि रेजिस्टेंस फ्रंट अब और भी ताक़तवर हो गया है और वह पूरी तरह से Hezbollah के साथ खड़ा है। वहीं दूसरी तरफ Hezbollah के नेता Naim Qassem ने इसराइल के साथ किसी भी सीधी बातचीत को साफ़ तौर पर मना कर दिया है। उनका कहना है कि ऐसी बातचीत लेबनान के लिए ठीक नहीं होगी और वे अपने हथियारों को नहीं छोड़ेंगे।

इसराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच ताज़ा लड़ाई में क्या हुआ?

लेबनान के दक्षिणी हिस्से में तनाव बढ़ गया है। इसराइल की सेना ने दावा किया है कि उन्होंने Hezbollah के तीन operatives को मार गिराया है और Bint Jbeil सेक्टर में उनके मुख्यालय पर हमला किया है। Hezbollah ने भी जवाब देते हुए इसराइली सैनिकों पर एंटी-टैंक मिसाइल से हमला किया। हालांकि दोनों के बीच ceasefire की अवधि तीन हफ्ते और बढ़ा दी गई है, लेकिन Hezbollah ने वॉशिंगटन द्वारा कराई जा रही बातचीत में हिस्सा नहीं लिया है।

रूस और अमेरिका के साथ ईरान की क्या बातचीत चल रही है?

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi 27 अप्रैल 2026 को रूस के सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचे। वहां उन्होंने इसराइल और अमेरिका के खिलाफ चल रही जंग को लेकर रूसी अधिकारियों से चर्चा की। इसी बीच खबर आई है कि ईरान ने पाकिस्तान के ज़रिए अमेरिका को एक प्रस्ताव भेजा है। इसमें कहा गया है कि अगर अमेरिका ईरान की नाकेबंदी खत्म करता है, तो ईरान Hormuz Strait पर लगी पाबंदियां हटा सकता है, लेकिन वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई बात नहीं करेगा।