मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने साफ़ शब्दों में कहा है कि जब तक इसराइल लेबनान से अपनी सेना पूरी तरह पीछे नहीं हटा लेता, तब तक इस क्षेत्र में शांति स्थापित नहीं हो सकती। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब हिज़बुल्लाह ने अमेरिका की मध्यस्थता में तैयार हुई सीजफायर डील को पूरी तरह खारिज कर दिया है और इसराइली हमले लगातार जारी हैं।

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IRGC और हिजबुल्लाह ने क्यों खारिज की सीजफायर डील?

ईरान के कुड्स फोर्स के प्रमुख इस्माइल कानी ने कहा कि लेबनान में प्रतिरोध का समर्थन करना सभी का कर्तव्य है और इसराइल को इस क्षेत्र से बाहर निकालना मुसलमानों के लिए एक संभव लक्ष्य है। ईरान की मुख्य शर्त यह है कि सीजफायर लेबनान सहित सभी मोर्चों पर एक साथ होना चाहिए।

  • पुरानी स्थिति पर लौटने की मांग: हिज़बुल्लाह और ईरान की मांग है कि इसराइली सेना 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध से पहले वाली स्थिति पर वापस जाए।
  • हिज़बुल्लाह का इनकार: हिज़बुल्लाह के महासचिव शेख नईम कासिम ने कहा कि बिना सुरक्षा गारंटी के वे लड़ना बंद नहीं करेंगे। उनके लिए दक्षिणी लेबनान खाली करने की शर्त एक तरह से आत्मसमर्पण करने जैसी है और वे इसे स्वीकार नहीं करेंगे।

जमीन पर क्या है ताजा स्थिति और ईरान का रुख?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने कहा है कि युद्ध को समाप्त करने के लिए चल रही बातचीत में अभी तक कोई खास प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते में लेबनान से इसराइली सैनिकों की वापसी शामिल होनी चाहिए। दूसरी ओर, इसराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में अपने अभियान जारी रखने की बात कही है।

ताजा हमलों में दक्षिणी लेबनान में कम से कम चार लोग मारे गए हैं और दोनों तरफ से हो रही गोलाबारी में एक संयुक्त राष्ट्र (UN) शांति रक्षक की भी मौत हुई है। इसराइल ने 2 मार्च से दक्षिणी लेबनान में एक सुरक्षा क्षेत्र बना रखा है। इसके अलावा ईरान इस समय अमेरिका के साथ हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर भी बातचीत का प्रयास कर रहा है ताकि लेबनान में कुछ राहत मिल सके। वहीं लेबनान के राष्ट्रपति ने सीजफायर के प्रयासों के लिए कतर की भूमिका की तारीफ की है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

IRGC ने सीजफायर के लिए क्या मुख्य शर्त रखी है?

IRGC ने शर्त रखी है कि इसराइल को लेबनान पर हमले तुरंत रोकने होंगे, अपनी सेना को अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पीछे वापस बुलाना होगा और लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना होगा।

हिज़बुल्लाह ने अमेरिका के समझौते को क्यों ठुकरा दिया?

हिज़बुल्लाह के नेता शेख नईम कासिम के अनुसार, समझौते में उनके लड़ाकों को दक्षिणी लेबनान छोड़ने के लिए कहा गया था, जिसे उन्होंने अपमानजनक और आत्मसमर्पण करने जैसा बताया।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.