ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. इसराइल के एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक ऐसे डेडलॉक यानी गतिरोध में फंसा दिया है जहां से निकलना उनके लिए मुश्किल हो रहा है. इस टकराव में अमेरिका और इसराइल अपने मुख्य मकसद हासिल नहीं कर पा रहे हैं और सैन्य जोखिम बढ़ता जा रहा है.

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ट्रंप और ईरान के बीच क्या है पूरा विवाद?

डोनाल्ड ट्रंप ने 13 अप्रैल 2026 को ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी करने का आदेश दिया था. ट्रंप का दावा था कि अमेरिकी नौसेना हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आने-जाने वाले जहाजों को रोकेगी. हालांकि, बाद में अमेरिकी कमांड (CENTCOM) ने इस बात को साफ़ किया कि यह नाकाबंदी केवल ईरानी बंदरगाहों पर जाने वाले जहाजों के लिए है, सभी अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए नहीं. वहीं, ईरान ने साफ़ कहा कि उनके लिए हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह उनके नियंत्रण में है और नागरिक जहाजों के लिए खुला है.

ईरान और इसराइल ने क्या प्रतिक्रिया दी?

ईरान की नौसेना ने चेतावनी दी है कि अगर कोई भी विदेशी सैन्य जहाज हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के करीब आया, तो उसे ceasefire यानी युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा और सख्ती से जवाब दिया जाएगा. IRGC के कमांडर एस्माइल कानी ने कहा कि अमेरिका और इसराइल को बिना किसी कामयाबी के पश्चिम एशिया छोड़ना पड़ेगा. इस बीच, इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने पुष्टि की कि उनकी सेना ने 6 अप्रैल को ईरान के इंटेलिजेंस चीफ माजिद खादेमी को मार गिराया, जो ईरान के हमलों का जवाब था.

तनाव से जुड़ी मुख्य जानकारियों की सूची

घटना तारीख मुख्य विवरण
माजिद खादेमी की मौत 6 अप्रैल 2026 अमेरिका और इसराइल के हमले में मारे गए
नौसेना नाकाबंदी 13 अप्रैल 2026 ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों को रोकने का आदेश दिया
IRGC की चेतावनी 12 अप्रैल 2026 हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर पूरा नियंत्रण का दावा
मीडिया रिपोर्ट 24 मार्च 2026 हिब्रू मीडिया ने डेडलॉक की बात कही
IRGC की तैयारी 17 अप्रैल 2026 किसी भी हमले का घातक जवाब देने को तैयार
तेल की आवाजाही हालिया अपडेट नाकाबंदी के बावजूद ईरान ने लाखों बैरल तेल भेजा