हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। 25 और 26 जून 2026 को ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सख्त चेतावनी दी, जिसके बाद तीन बड़े तेल टैंकरों को अपना रास्ता बदलना पड़ा और उन्हें वापस लौटना पड़ा। इन जहाजों में UAE का BLUE STAR I, जापान का AZUMASAN और OMEGA TRADER शामिल थे।

ईरान ने दी सख्त चेतावनी

IRGC ने साफ कर दिया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकलने के लिए केवल ईरान द्वारा बताए गए रास्तों का ही इस्तेमाल किया जाए। ईरान ने कहा कि दूसरे रास्तों से जाना खतरनाक और प्रतिबंधित है और ऐसा करने वालों से निपटा जाएगा। साथ ही यह भी कहा गया कि जहाजों को सफर के दौरान IRGC नेवी के संपर्क में रहना होगा।

ओमान और IMO के बीच विवाद

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब ओमान ने 23 जून 2026 को इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) के साथ मिलकर नए अस्थायी शिपिंग रूट तय किए थे। ईरान ने इन नए रास्तों को मानने से साफ इनकार कर दिया। ओमान के विदेश मंत्री सैयद बदर बिन हमद अल बुसैदी ने 25 जून को बताया कि भविष्य में जलडमरूमध्य के इंतजामों में कोई ट्रांजिट फीस नहीं ली जाएगी।

ड्रोन हमला और IMO का फैसला

25 जून को ओमान तट के पास एक अज्ञात कार्गो शिप पर हमला हुआ। अमेरिकी अधिकारियों ने कन्फर्म किया कि यह हमला ईरान के एक ड्रोन से हुआ था। इस घटना के बाद IMO के सेक्रेटरी जनरल आर्सेनियो डोमिंगुएज़ ने सुरक्षा कारणों से जहाजों को बाहर निकालने के ऑपरेशन को फिलहाल रोक दिया है।

अमेरिका की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय कानून

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग किसी एक देश की जागीर नहीं होते। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने टोल या फीस लगाने की कोशिश की, तो इससे पूरी दुनिया में अराजकता फैल सकती है। अंतरराष्ट्रीय कानून और 1982 के UNCLOS नियमों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य में जहाजों को आने-जाने का अधिकार है और कोई भी देश एकतरफा फीस नहीं थोप सकता।

समझौते के बावजूद तनाव

हैरानी की बात यह है कि ये सब तब हो रहा है जब 18 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता (MoU) हुआ था। इस समझौते का मकसद दुश्मनी खत्म करना और जलडमरूमध्य को फिर से खोलना था, जिसमें 60 दिनों तक ट्रांजिट फीस न लेने की बात कही गई थी। इसके बावजूद, ईरान की पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने कहा कि जो जहाज उनके बताए रास्तों के बाहर जाएंगे, उन्हें इंश्योरेंस और सुरक्षित passage की गारंटी नहीं मिलेगी।