इसराइल और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बहुत बढ़ गया है। इसराइल की सेना ने साफ कर दिया है कि वे ईरान की तरफ से होने वाले किसी भी हमले का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। फिलहाल वहां की सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके।

14 जून 2026 को IDF चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल Eyal Zamir ने जानकारी दी कि सेना सभी मोर्चों पर पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने बताया कि आने वाले कुछ घंटों में ईरान की तरफ से बैलिस्टिक मिसाइल हमला हो सकता है और उनके जवान इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने इस तनाव को बेरूत में किए गए हवाई हमलों से जोड़कर देखा, जो हिजबुल्लाह के ड्रोन हमलों के जवाब में किए गए थे।

इस मामले में प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और रक्षा मंत्री Israel Katz ने एक साझा बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि इसराइल अपनी जमीन पर होने वाली किसी भी गोलाबारी या हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा। इससे पहले 8 जून 2026 को भी IDF ने अपनी तैयारी के बारे में बताया था कि वे हमले और बचाव दोनों के लिए तैयार हैं।

पिछले 24 घंटों की बात करें तो लेबनान से छोड़े गए दो ड्रोन उत्तरी इसराइल में गिरे, हालांकि इनमें किसी के घायल होने की खबर नहीं आई। इसके जवाब में इसराइल ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए। साथ ही, दक्षिण लेबनान के 29 गांवों में रहने वाले लोगों को वहां से हटने की चेतावनी दी गई है क्योंकि वहां और हमले हो सकते हैं।

दूसरी तरफ, ईरान के ब्रिगेडियर जनरल Mohammad Jafar Asadi ने चेतावनी दी है कि बेरूत में हुए हमलों का जवाब जरूर दिया जाएगा। ईरान के टॉप बातचीत करने वाले अधिकारी Mohammad Baqer Qalibaf ने अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि इसराइल के हमले दिखाते हैं कि अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में नाकाम रहा है।

इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif एक शांति समझौते के लिए कोशिशें कर रहे हैं। 14 जून 2026 को इस समझौते को औपचारिक रूप देने की उम्मीद थी, लेकिन ईरानी मीडिया के मुताबिक तेहरान ने अभी तक इस पर अपना अंतिम फैसला नहीं लिया है।