ईरान और इसराइल के बीच पिछले कई हफ्तों से चला आ रहा शांति का माहौल अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। संघर्ष के 100वें दिन यानी सोमवार, 8 जून 2026 को दोनों देशों के बीच का सीजफायर अचानक टूट गया। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे पर सीधे मिसाइल दागे और हवाई हमले किए। इस नए हमले के बाद पूरी दुनिया में डर का माहौल बन गया है और वैश्विक नेताओं ने तुरंत शांति की अपील शुरू कर दी है।

ईरान और इसराइल के बीच सोमवार को क्या-क्या हुआ?

8 जून 2026 को दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य हमले देखने को मिले। इस संघर्ष से जुड़े मुख्य अपडेट इस प्रकार हैं:

  • ईरान के शहरों में धमाके: सोमवार को ईरान के तेहरान, इस्फहान और तबरीज जैसे बड़े शहरों में जोरदार धमाकों की आवाज सुनी गई।
  • इसराइल के हमले: इसराइली सेना ने पश्चिमी और मध्य ईरान में स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इसमें माहशहर में मौजूद कारुन पेट्रोकेमिकल कंपनी भी शामिल है।
  • ईरान की जवाबी कार्रवाई: ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उन्होंने इसराइल के नेवातिम और तेल नोफ एयरबेस पर मिसाइल हमले किए हैं।
  • इसराइल में स्कूल बंद: हमलों के खतरे को देखते हुए इसराइल ने अपने देश में सभी स्कूलों को तुरंत बंद करने का आदेश जारी किया है।

डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी और वैश्विक नेताओं की अपील

इस बड़े सैन्य टकराव के बाद दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इसराइल और ईरान दोनों ही तुरंत सीजफायर चाहते हैं और शांति के लिए बातचीत चल रही है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी तरह की नासमझी से इस शांति प्रक्रिया को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। उन्होंने इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से तुरंत जवाबी कार्रवाई न करने की अपील भी की है।

इसके अलावा भारत ने भी इस नए हमले पर गहरा दुख जताया है और दोनों पक्षों से बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की अपील की है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस ने भी दोनों देशों से तुरंत तनाव कम करने को कहा है। वहीं सऊदी अरब, मिस्र, तुर्की, पाकिस्तान और कतर जैसे क्षेत्रीय देशों ने अमेरिका से इसराइल पर दबाव बनाने की मांग की है।

यमन के हुती विद्रोहियों का बड़ा ऐलान और आर्थिक असर

इस संघर्ष में यमन के हुती विद्रोही भी कूद पड़े हैं। हुती विद्रोहियों ने इसराइल पर मिसाइल हमला करने का दावा किया है। इसके साथ ही उन्होंने लाल सागर में इसराइली जहाजों की आवाजाही पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। इस नए तनाव के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ा है। एशियाई शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई है और दुनिया भर में तेल की सप्लाई बाधित होने का डर बढ़ गया है, जिससे आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ने की आशंका है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान और इसराइल के बीच सीजफायर कब और क्यों टूटा?

दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल 2026 से चल रहा सीजफायर 8 जून 2026 को टूट गया। इसकी शुरुआत 7 जून को संघर्ष के 100वें दिन हिजबुल्लाह के रॉकेट हमले और उसके बाद इसराइल की जवाबी कार्रवाई से हुई, जिसके बाद दोनों देशों ने सीधे मिसाइल हमले किए।

इस हमले का आम लोगों और दुनिया पर क्या असर पड़ा है?

इस हमले के कारण इसराइल में स्कूल बंद कर दिए गए हैं। वैश्विक स्तर पर एशियाई बाजारों में गिरावट आई है और लाल सागर में हुती विद्रोहियों के प्रतिबंध के कारण व्यापार और ऊर्जा की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है।