ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बगेर गालबाफ ने इसराइल को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि लेबनान पर लगातार हो रहे हमले दो हफ्ते के सीजफायर समझौते का सीधा उल्लंघन हैं। अगर ये हमले तुरंत नहीं रुके, तो ईरान इसका सख्त जवाब देगा और इसकी भारी कीमत वसूल करेगा। यह तनाव ऐसे समय में बढ़ा है जब 8 अप्रैल 2026 को ही दोनों पक्षों के बीच हमलों को रोकने का एक समझौता हुआ था।
सीजफायर समझौते पर क्यों बढ़ा विवाद?
इस ताजा विवाद की मुख्य वजह सीजफायर के नियमों को लेकर अलग-अलग राय होना है। ईरान और पाकिस्तान जैसे देशों का मानना है कि इस समझौते में लेबनान भी शामिल है, जबकि इसराइल इसे मानने को तैयार नहीं है।
- ईरान का पक्ष: ईरान का कहना है कि लेबनान और हिजबुल्लाह इस सीजफायर का हिस्सा हैं और उन पर हमला समझौते को तोड़ना है।
- इसराइल का रुख: प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ किया है कि हिजबुल्लाह के खिलाफ उनकी कार्रवाई जारी रहेगी क्योंकि वे समझौते के दायरे में नहीं आते।
- नुकसान की रिपोर्ट: 8 अप्रैल को लेबनान पर हुए भारी हमलों में 182 लोगों की मौत हुई और लगभग 900 लोग घायल हुए हैं।
ईरान की जवाबी कार्रवाई और हॉर्मुज की स्थिति
ईरान ने इसराइल के हमलों के विरोध में कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से बंद कर दिया है और वहां से जहाजों की आवाजाही पर बड़ी पाबंदी लगा दी है।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| जहाजों की सीमा | अब केवल 15 जहाजों को रोजाना निकलने की अनुमति मिलेगी |
| सुरक्षा के उपाय | ईरान ने समुद्र में माइंस बिछाने के संकेत दिए हैं |
| डिप्लोमैटिक वार्ता | ईरानी टीम बातचीत के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद पहुंचेगी |
| हिजबुल्लाह का एक्शन | उत्तरी इसराइल पर रॉकेट से जवाबी हमला किया गया |
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा है कि इसराइल की ये हरकतें शांति वार्ता को बेमतलब बना रही हैं। वहीं संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने भी इन हमलों की निंदा की है और चेतावनी दी है कि इससे पूरे क्षेत्र में युद्ध का खतरा और बढ़ सकता है। फिलहाल खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों के लिए समुद्री रास्तों पर बढ़ती पाबंदी एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है।