ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इज़राइल द्वारा देश की परमाणु सुविधाओं और स्टील प्लांटों पर किए गए हमलों की कड़ी आलोचना की है। शुक्रवार 27 मार्च 2026 को दिए अपने बयान में उन्होंने कहा कि इन अपराधों के लिए तेहरान इज़राइल से भारी कीमत वसूलेगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष को रोकने के लिए कूटनीतिक बातचीत जारी है और क्षेत्र में पहले से ही काफी तनाव बना हुआ है।

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इज़राइल ने ईरान के किन खास ठिकानों को बनाया निशाना

इज़राइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने आधिकारिक तौर पर ‘ऑपरेशन राइजिंग लायन’ के तहत ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर बमबारी की पुष्टि की है। इज़राइल का मानना है कि इन जगहों पर ईरान परमाणु हथियार बनाने के लिए सामग्री तैयार कर रहा था।

  • ईरान के अराक भारी जल संयंत्र पर हवाई हमला किया गया।
  • यज्द में मौजूद यूरेनियम निकालने वाली फैक्ट्री को निशाना बनाया गया।
  • दो बड़े स्टील कारखानों और एक पावर प्लांट पर भी मिसाइलें गिरीं।
  • इज़राइल का दावा है कि अराक प्लांट को परमाणु हथियार ग्रेड प्लूटोनियम बनाने से रोकने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या हो रही है चर्चा

ईरानी विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ फोन पर बातचीत की और इसे अमेरिका और इज़राइल की मिलीभगत बताया। अराघची ने कहा कि ये हमले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कूटनीति के लिए दी गई समय सीमा के बीच में हुए हैं जो काफी चिंताजनक है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के लिए कानूनी तौर पर बचाव करने का अधिकार रखता है। इसके साथ ही उन्होंने खाड़ी देशों को चेतावनी दी है कि वे अपनी जगहों पर अमेरिकी सैनिकों को पनाह न दें क्योंकि वे नागरिकों को ढाल की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इस संकट को सुलझाने के लिए जीन अर्नोल्ट को अपना विशेष दूत नियुक्त किया है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.