इरान और इसराइल के बीच चल रही जंग में अब थोड़ी शांति दिख रही है। दोनों देशों ने हमलों को कुछ समय के लिए रोकने का संकेत दिया है। हालांकि, इस तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी हुई है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर असर पड़ सकता है।

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इरान और इसराइल के बीच क्या हुआ और अब क्या स्थिति है

यह पूरा मामला 7 जून 2026 को शुरू हुआ जब इरान ने इसराइल पर मिसाइल हमले किए। इसके जवाब में 8 जून को इसराइल ने इरान के मध्य और पश्चिमी हिस्सों में हवाई हमले किए, जिससे तेहरान और मध्य इसराइल में धमाके सुनाई दिए। 9 जून को दोनों देशों ने हमलों को अस्थायी तौर पर रोकने की बात कही है।

इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि फिलहाल इस मोर्चे पर आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इरान ने दोबारा हमला किया तो उसका जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा। वहीं, इरान के सैन्य कमांड ने बताया कि उन्होंने इसराइल को करारा जवाब दिया है और अब हमले रोक दिए हैं, लेकिन लेबनान में किसी भी हरकत पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी दोनों देशों से तुरंत गोलाबारी रोकने की अपील की और शांति के लिए बातचीत चलाने की बात कही है।

तेल की कीमतों पर असर और खाड़ी देशों का हाल

युद्ध के डर से वैश्विक बाज़ार में खलबली मच गई। 8 जून 2026 को कच्चे तेल की कीमतों में 5 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई। बाज़ार में यह डर था कि अगर लड़ाई और बढ़ी तो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाला तेल का व्यापार रुक सकता है।

इस तनाव का असर सऊदी अरब में भी दिखा, जहाँ अल खरज गवर्नरट में मिसाइल अलर्ट के सायरन बजाए गए। यह इलाका प्रिंस सुल्तान एयर बेस का घर है। वहीं, यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इसराइल पर हमले का दावा किया और लाल सागर में जहाजों को खतरा पहुँचाने की चेतावनी दी। इस स्थिति को संभालने के लिए मिस्र, सऊदी अरब, तुर्की, पाकिस्तान और कतर जैसे देश कूटनीतिक कोशिशें कर रहे हैं ताकि मामला और न बिगड़े।

Frequently Asked Questions (FAQs)

इरान-इसराइल तनाव से तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा

तनाव के कारण 8 जून 2026 को कच्चे तेल की कीमतों में 5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई। इसका मुख्य कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग और तेल आपूर्ति बाधित होने का डर था।

सऊदी अरब में सायरन क्यों बजाए गए

8 जून को जब इसराइल ने इरान पर हवाई हमले किए, तब सुरक्षा कारणों से सऊदी अरब के अल खरज गवर्नरट में मिसाइल अलर्ट सायरन बजाए गए, जहाँ प्रिंस सुल्तान एयर बेस स्थित है।