ईरान की सेना (IRGC) ने इज़राइल के खिलाफ भारी मिसाइल और ड्रोन हमले करने की चेतावनी दी है। यह धमकी गाजा और लेबनान में चल रहे सैन्य अभियानों के जवाब में दी गई है। 24 मार्च 2026 को ईरान ने इज़राइल पर कई मिसाइलें दागीं, जिससे वहां के शहरों में सायरन बजने लगे और कई इमारतों को नुकसान पहुँचा है। इस तनाव ने खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा और शांति को लेकर बड़ी चिंता पैदा कर दी है।
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किन ठिकानों को बनाया जा सकता है निशाना?
ईरान ने स्पष्ट किया है कि अगर उसकी ऊर्जा सुविधाओं या पावर प्लांट को नुकसान पहुंचाया गया, तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा। इसके दायरे में इज़राइल के साथ-साथ वे क्षेत्रीय देश भी आ सकते हैं जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को भी बंद करने की धमकी दी है, जो दुनिया के तेल व्यापार के लिए सबसे ज़रूरी रास्ता माना जाता है।
| प्रमुख घटना | तारीख | ताजा अपडेट |
|---|---|---|
| ईरानी मिसाइल हमला | 24 मार्च 2026 | तेल अवीव और उत्तरी इज़राइल में मिसाइलें गिरीं। |
| इज़राइली स्ट्राइक | 24 मार्च 2026 | लेबनान में हिज़्बुल्लाह और तेहरान में IRGC मुख्यालय पर हमला। |
| ओमान की प्रतिक्रिया | 28 फरवरी 2026 | सैन्य अभियानों पर गहरा दुख जताया और शांति की अपील की। |
खाड़ी में रहने वाले प्रवासियों पर क्या होगा असर?
खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लाखों भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह स्थिति काफी संवेदनशील है। ईरान ने सऊदी अरब, कुवैत और यूएई में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को लेकर भी फुटेज जारी किए हैं। अगर यह संघर्ष और बढ़ता है, तो हवाई यात्रा के रूट बदल सकते हैं और तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है। ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी रिपोर्ट दी है कि समुद्री रास्तों पर कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाया गया है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने तनाव कम करने के लिए बातचीत का दावा किया था, लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसे मनोवैज्ञानिक युद्ध बताते हुए किसी भी बातचीत से इनकार कर दिया है। खाड़ी देशों में काम करने वाले लोगों को सलाह दी जाती है कि वे अपने दूतावासों द्वारा जारी सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन करें और आधिकारिक खबरों पर ही भरोसा करें।