ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इज़राइल को लेकर एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि उनके पास ऐसी खुफिया जानकारी है जिससे पता चलता है कि इज़राइल ईरान के बुनियादी ढांचे यानी Infrastructure पर फिर से हमला करने की योजना बना रहा है। अराघची ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अगर ईरान के किसी भी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया, तो तेहरान इस बार कोई संयम नहीं बरतेगा और पूरी ताकत से जवाब देगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब 28 फरवरी 2026 से शुरू हुआ यह संघर्ष अब काफी खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है।

ईरान ने अपनी चेतावनी में किन मुख्य बातों का जिक्र किया है?

विदेश मंत्री अराघची ने जोर देकर कहा कि ईरान की पिछली जवाबी कार्रवाई उसकी शक्ति का केवल एक हिस्सा थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पहले जो संयम दिखाया गया था, वह केवल तनाव कम करने के अनुरोधों की वजह से था। ईरान की अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं नीचे दी गई हैं:

  • Zero Restraint Policy: अगर अब हमला हुआ तो ईरान किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव या संयम की नीति को नहीं मानेगा।
  • ब्रिटेन को चेतावनी: ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेट कूपर को कहा गया है कि यदि ब्रिटेन ने अमेरिका या इज़राइल को सैन्य अड्डों का उपयोग करने दिया, तो इसे ईरान के खिलाफ युद्ध माना जाएगा।
  • पर्यटन स्थलों पर खतरा: ईरान के सैन्य प्रवक्ता जनरल अबुलफज़ल शेकरची ने चेतावनी दी है कि दुश्मन देशों के पार्क और पर्यटन स्थल अब सुरक्षित नहीं रहेंगे।
  • संयुक्त राष्ट्र का हवाला: ईरान ने अपनी रक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत आत्मरक्षा के अधिकार का उपयोग करने की बात कही है।

खाड़ी देशों और प्रवासियों पर इस तनाव का क्या असर हुआ है?

इस युद्ध का असर खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और विशेष रूप से भारतीयों पर भी पड़ रहा है। हालिया हमलों ने ईंधन और गैस की सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया है। कुवैत और कतर जैसे देशों में तेल और गैस के ठिकानों को नुकसान पहुंचने से आर्थिक चिंताएं बढ़ गई हैं। पिछले 48 घंटों के मुख्य घटनाक्रम इस प्रकार हैं:

क्षेत्र नुकसान और प्रभाव
कतर (Qatar) रास लफान गैस परिसर को नुकसान, LNG निर्यात क्षमता 17-20% तक घटी।
कुवैत (Kuwait) ईरानी ड्रोन हमलों से तेल रिफाइनरी को काफी नुकसान हुआ।
इज़राइल (Israel) ईरान ने तेल अवीव और यरूशलेम सहित कई शहरों पर मिसाइलें दागीं।
ईरान (Iran) इज़राइल ने तेहरान और नूर क्षेत्र में 130 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

भारत और जापान जैसे देशों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। अमेरिका ने भी ईरान के मिसाइल उत्पादन केंद्रों पर स्ट्राइक की रिपोर्ट दी है, जबकि नाटो ने इराक से अपने मिशन को हटाकर यूरोप शिफ्ट कर दिया है।