ईरान और इसराइल के बीच चल रहा तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा है कि लेबनान पर इसराइली हमले कूटनीति और शांति की कोशिशों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम के बावजूद, लेबनान में जारी हिंसा ने पूरे मिडिल ईस्ट की शांति को खतरे में डाल दिया है। ईरान का दावा है कि समझौते में लेबनान भी शामिल था, जबकि इसराइल इसे मानने को तैयार नहीं है।

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युद्धविराम समझौते पर क्यों मचा है बवाल?

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अमेरिका को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को या तो युद्धविराम चुनना होगा या इसराइल के जरिए जारी युद्ध, दोनों एक साथ नहीं चल सकते। ईरान का कहना है कि समझौते की शर्तों का उल्लंघन हुआ है, जिसमें उनकी हवाई सीमा का मुद्दा भी शामिल है। वहीं, इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका-ईरान के बीच हुई संधि Hezbollah के खिलाफ उनके अभियान पर लागू नहीं होती है।

लेबनान में तबाही और मौजूदा हालात क्या हैं?

पिछले 24 घंटों में लेबनान के अंदर हालात काफी खराब हो गए हैं। इसराइली सेना ने हिजबुल्ला के ठिकानों पर अब तक का सबसे बड़ा हमला करने का दावा किया है। इससे न केवल जान-माल का नुकसान हुआ है बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

विवरण ताजा जानकारी (9 अप्रैल, 2026)
मौतों की संख्या 254 लोग मारे गए
घायलों की संख्या 1,165 लोग घायल हुए
ईरान की कार्रवाई Strait of Hormuz को बंद किया गया
इसराइल का रुख हिजबुल्ला के कमांड सेंटरों पर हमले जारी
अमेरिका की चेतावनी Donald Trump ने समझौते के पालन की शर्त रखी

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या हो रही है प्रतिक्रिया?

संयुक्त राष्ट्र ने लेबनान में हो रही मौतों पर गहरा दुख जताया है और इसे भयावह बताया है। फ्रांस के राष्ट्रपति Macron कोशिश कर रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के दायरे को बढ़ाकर लेबनान तक ले जाया जाए ताकि आम लोगों को बचाया जा सके। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी इस समझौते की शर्तों पर सफाई मांग रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से समुद्री रास्तों पर असर पड़ा है, जिसे लेकर अमेरिका ने तुरंत इसे खोलने की मांग की है। क्षेत्र में रहने वाले प्रवासियों और व्यापार पर इस तनाव का सीधा असर पड़ने की संभावना है।