ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इज़राइल के डिमोना और हाइफ़ा जैसे प्रमुख शहरों पर मिसाइल हमलों की पुष्टि की है। यह कार्रवाई पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों और हालिया अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई है। इस ताज़ा हमले ने मिडिल ईस्ट में तनाव को बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचा दिया है, क्योंकि मिसाइलें इज़राइल के महत्वपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों के पास गिरी हैं।

ईरान और इज़राइल के बीच तनाव क्यों बढ़ा?

मिडिल ईस्ट में युद्ध की स्थिति पिछले कुछ दिनों से बनी हुई है। 21 मार्च को इज़राइल और अमेरिका ने ईरान के नतान्ज़ परमाणु स्टेशन पर बमबारी की थी, जिसके जवाब में ईरान ने डिमोना और अराद पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इसके बाद 24 मार्च को अमेरिका ने एक हवाई हमले में ईरान के बड़े नेता अली लारीजानी को मार दिया। ईरान ने अब इस मौत का बदला लेने के लिए अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रखा है और इज़राइल पर हमलों की लहरें तेज़ कर दी हैं।

हमलों में अब तक क्या नुकसान हुआ है?

ईरान और हिजबुल्लाह की तरफ से इज़राइल पर लगातार रॉकेट और मिसाइलें दागी जा रही हैं। डिमोना परमाणु केंद्र के पास हुए पहले के हमलों में 200 से ज्यादा लोगों के हताहत होने की खबर थी। ताज़ा जानकारी के अनुसार, मंगलवार को हुए हमलों में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई और कई लोग घायल हुए हैं। यह पहली बार देखा गया है कि ईरान की मिसाइलें इज़राइल के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले परमाणु सुविधा क्षेत्र की हवाई सुरक्षा को भेदने में सफल रही हैं।

हालिया सैन्य घटनाओं का पूरा विवरण

तारीख मुख्य घटना
21 मार्च 2026 नतान्ज़ परमाणु केंद्र पर हमला और ईरान का पलटवार
23 मार्च 2026 डिमोना और तेल अवीव पर ईरान की 78वीं लहर के हमले
24 मार्च 2026 अमेरिकी हमले में ईरानी नेता अली लारीजानी की मौत
25 मार्च 2026 हाइफ़ा और डिमोना पर ईरान के नए मिसाइल हमले

ईरान की सरकार ने साफ़ किया है कि वह अमेरिका के साथ किसी तरह की बातचीत नहीं कर रही है। ईरान के संसद अध्यक्ष ने ट्रंप पर तेल और वित्तीय बाज़ारों में हेरफेर करने की कोशिश का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, इज़राइल ने भी कसम खाई है कि वह ईरान पर हमले जारी रखेगा। हर रोज़ ईरान की तरफ से औसतन 10 मिसाइलें और हिजबुल्लाह की तरफ से 30 रॉकेट इज़राइल की ओर दागे जा रहे हैं।