ईरान और इजराइल के बीच चल रहा युद्ध अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। मंगलवार 24 मार्च 2026 को ईरान ने न केवल इजराइल बल्कि बहरीन और सऊदी अरब जैसे देशों की तरफ भी कई मिसाइलें और ड्रोन भेजे हैं। इस हमले में इजराइल के उत्तरी हिस्से में एक महिला की जान चली गई है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि कई देशों ने अपनी हवाई सुरक्षा प्रणाली को पूरी तरह अलर्ट पर रखा है और कुछ जगहों पर इसके कारण बिजली की समस्या भी देखी गई है।
ℹ: Iran Bushehr Nuclear Plant: ईरान में न्यूक्लियर प्लांट के पास गिरा मिसाइल, सुरक्षित हैं सभी कर्मचारी।
हमले में कहां कितना नुकसान हुआ है?
ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलें इजराइल के तेल अवीव और हाइफा जैसे बड़े शहरों में गिरी हैं। हाइफा में क्लस्टर बमों का इस्तेमाल किया गया है जिससे कई जगहों पर नुकसान हुआ है। हिजबुल्लाह ने भी लेबनान की सीमा से इजराइल के सैन्य ठिकानों और रडार साइटों पर रॉकेट दागे हैं। जवाब में इजराइली वायुसेना ने ईरान के भीतर घुसकर उसके हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियों और मिसाइल लॉन्च पैड पर बमबारी की है।
खाड़ी देशों और प्रवासियों पर क्या असर पड़ा?
इस युद्ध की आंच अब उन देशों तक भी पहुंच रही है जहां बड़ी संख्या में भारतीय और अन्य विदेशी नागरिक रहते हैं। खाड़ी देशों से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार स्थिति कुछ इस प्रकार रही है:
- बहरीन और कुवैत: बहरीन ने अपनी सीमा में आते कई ड्रोन्स को मार गिराया है, जबकि कुवैत में हवाई रक्षा प्रणाली के सक्रिय होने से कुछ इलाकों में बिजली गुल रही।
- सऊदी अरब और यूएई: इन दोनों देशों ने अपनी हवाई सुरक्षा के जरिए ईरानी मिसाइलों और ड्रोन्स को हवा में ही रोक दिया है।
- लेबनान की स्थिति: लेबनान सरकार ने ईरान के राजदूत को देश छोड़ने का आदेश दिया है और हिजबुल्लाह से हमले रोकने को कहा है।
- इजराइल का नया फैसला: इजराइल ने लेबनान के दक्षिणी हिस्से में एक सुरक्षा जोन बनाने का ऐलान किया है और लिटानी नदी के पुलों को तोड़ दिया है।
शांति की कोशिशों और ट्रंप का बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए उनकी सीधी बातचीत चल रही है। ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान के बिजली घरों और तेल के ठिकानों पर होने वाले हमलों को पांच दिनों के लिए रोक रहे हैं। हालांकि ईरान के नेताओं ने इन दावों को पूरी तरह सही नहीं माना है और कहा है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए लड़ते रहेंगे। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति से बात की है और युद्ध रोककर शांति बहाली पर जोर दिया है।
