ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत इसराइल के बड़े शहरों पर भीषण हमला किया है. इस हमले में भारी मिसाइलों और ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया है जिसने तेल अवीव और हाइफा जैसे इलाकों को निशाना बनाया. इस कार्रवाई में यमन और हिजबुल्लाह ने भी ईरान का साथ दिया है जिससे पूरे इलाके में तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है. इस हमले के बाद इसराइल में सायरन बजने लगे और अफरातफरी का माहौल देखा गया.

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ईरान के इस बड़े हमले में क्या-क्या हुआ?

ईरान की सरकारी मीडिया और समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, यह हमला गुरुवार रात को शुरू हुआ जिसे ‘वेव 91’ का नाम दिया गया है. इसमें भारी बैलिस्टिक मिसाइलें और आधुनिक हमलावर ड्रोन शामिल थे. हमले की वजह से इसराइल के करीब 50 लाख निवासियों को अपनी जान बचाने के लिए जमीन के नीचे बने बंकरों में शरण लेनी पड़ी. इस हमले में तेल अवीव के जाफा क्षेत्र और कई मुख्य हवाई अड्डों को निशाना बनाया गया है. बताया जा रहा है कि इसराइल के अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम को भी इस हमले से काफी नुकसान पहुंचा है.

यमन और हिजबुल्लाह की भूमिका और हमले का असर

यमन के सैन्य प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि उन्होंने ईरान और हिजबुल्लाह के साथ मिलकर यह साझा ऑपरेशन चलाया है. इस हमले के दौरान जमीन पर काफी असर देखा गया है जिसे नीचे दिए गए बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • यमन ने दक्षिण इसराइल और डिमोना के इलाकों की ओर मिसाइलें छोड़ीं.
  • तेल अवीव के जाफा इलाके में तीनों ताकतों ने मिलकर हमला किया.
  • क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाने पर लिया गया.
  • लगातार हुए धमाकों की वजह से वहां की स्थानीय एजेंसियां राहत कार्य में पिछड़ गईं.
  • एक बड़े ईरानी मिसाइल ने कई जगहों पर भारी नुकसान पहुंचाया है जिसकी पुष्टि इसराइली मीडिया ने भी की है.
  • ईरान ने इस हमले में भारी वजन वाले वारहेड का इस्तेमाल किया है.