अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर कई बड़े बयान दिए हैं। मियामी में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि दुनिया ‘मिडिल ईस्ट के उभार’ के करीब है। उन्होंने इस संघर्ष में UAE, सऊदी अरब, कतर, बहरीन और कुवैत जैसे खाड़ी देशों के समर्थन की तारीफ की, वहीं NATO सहयोगियों पर नाराजगी जताई। इसी बीच, ईरान-इजरायल युद्ध अपने 30वें दिन में पहुंच गया है और अबू धाबी पर ईरानी मिसाइल हमले में 5 भारतीय घायल हुए हैं।

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ट्रंप ने क्या कहा ईरान और नाटो के बारे में?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (27 मार्च, 2026) को मियामी में कहा कि ईरान “तबाह हो रहा है” और अमेरिका की सेना दुनिया में सबसे ताकतवर है। उन्होंने नाटो सहयोगियों के प्रति अपनी निराशा दोहराई। ट्रंप ने आरोप लगाया कि नाटो देश होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में मदद के लिए सैन्य सहायता भेजने से पीछे हट गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नाटो अमेरिका के लिए मौजूद नहीं है, तो अमेरिका उनके लिए क्यों खड़ा रहे। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को गलती से ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ भी कह दिया था, हालांकि बाद में उन्होंने इसे सुधारा और कहा कि उनके साथ कोई भी चीज गलती से या अचानक नहीं होती।

खाड़ी क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध का 28 मार्च, 2026 को 30वां दिन है। हाल ही में, ईरान ने अबू धाबी पर बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी, जिसे यूएई ने मार गिराया, लेकिन इसके मलबे से 5 भारतीय घायल हुए। इजरायली सेना ने तेहरान में सत्ता के ठिकानों पर हमला किया, जहां करीब 10 जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। ईरान के बुशहर परमाणु संयंत्र पर भी 10 दिनों में तीसरी बार हमला हुआ है। लेबनान में इजरायली सेना के साथ हिजबुल्लाह की झड़पें हुई हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सहयोगी देशों की आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि सार्वजनिक रूप से वे कुछ भी कहें, लेकिन बंद कमरों में वे अमेरिकी नीतियों की सराहना करते हैं। वहीं, जर्मनी के चांसलर मर्त्ज ने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें सफल होने वाली योजना की कमी है। ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि ब्रिटेन इस युद्ध में शामिल नहीं होगा।