ईरान के करज शहर और अलबोर्ज प्रांत में एक के बाद एक कई बड़े धमाकों की खबर सामने आई है. 4 अप्रैल 2026 को ईरानी मीडिया ने बताया कि तेहरान के आसमान में लड़ाकू विमानों की आवाजें सुनी गई हैं और वहां एयर डिफेंस सिस्टम को एक्टिव कर दिया गया है. इस बीच अमेरिका और इसराइल की तरफ से ईरानी ठिकानों पर की गई बड़ी कार्रवाई की जानकारी भी मिली है जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है.

करज में धमाकों से कितना हुआ नुकसान

ईरानी अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि करज में हुए हमलों में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण B-1 ब्रिज को भारी नुकसान हुआ है. बताया गया है कि इस पुल का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा तबाह हो गया है और इसके सात में से छह खंभे बुरी तरह से टूट गए हैं. इस हमले को लेकर कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि उनके हवाई हमलों ने तेहरान और करज को जोड़ने वाले इस पुल को निशाना बनाया है.
  • ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने इस हमले का आरोप सीधे तौर पर इसराइल पर लगाया है.
  • ईरान के मसहूर और हस्तगेर्ड जैसे इलाकों में भी धमाकों के साथ लड़ाकू विमानों की हलचल देखी गई है.
  • IRGC के प्रवक्ता ने संकेत दिया है कि कुछ समय के लिए ईरानी हवाई क्षेत्र पर उनकी सेना का नियंत्रण कम हुआ था.

डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी और इसराइल की कार्रवाई

इस पूरे मामले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए 48 घंटे का अल्टीमेटम जारी किया है. ट्रंप ने कहा है कि ईरान को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को तुरंत खोलना होगा वरना उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. दूसरी तरफ इसराइली सेना ने तबरेज में ईरान के एक मोबाइल बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म को नष्ट करने का दावा किया है.

देश ताजा कार्रवाई और बयान
अमेरिका पुल को नष्ट किया और ईरान को 48 घंटे की मोहलत दी
इसराइल तबरेज में मिसाइल प्लेटफॉर्म को किया तबाह
ईरान एयर डिफेंस एक्टिव किया और जवाबी कार्रवाई की धमकी दी
तुर्की राष्ट्रपति एर्दोगन ने ईरान की स्थिति को गतिरोध बताया

ईरानी सेना ने इससे पहले 2 अप्रैल को दावा किया था कि उन्होंने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक अमेरिकी A-10 लड़ाकू विमान को निशाना बनाया है. वहीं कतर के रक्षा मंत्रालय ने भी जानकारी दी थी कि एक तेल टैंकर पर मिसाइल हमला हुआ है. वर्तमान स्थिति को देखते हुए खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और वहां की यात्रा करने वालों के लिए सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं.