Iran Oil Crisis: अमेरिकी नाकेबंदी से खार्ग द्वीप पर भरा तेल, अब 30 साल पुराने टैंकरों का लिया जा रहा सहारा
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से ईरान के तेल कारोबार पर बड़ा असर पड़ा है। ईरान के मुख्य तेल केंद्र खार्ग द्वीप पर कच्चे तेल को जमा करने की जगह अब खत्म होने वाली है। अमेरिकी नाकेबंदी के कारण तेल बाहर नहीं जा पा रहा है, जिससे वहां स्टोरेज फुल हो गया है। इस मुश्किल से बचने के लिए ईरान अब पुराने जहाजों का इस्तेमाल कर रहा है।
खार्ग द्वीप पर तेल भंडारण की क्या स्थिति है?
ईरान के खार्ग द्वीप पर अब बहुत कम जगह बची है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यहाँ केवल 13 मिलियन बैरल तेल रखने की क्षमता बची है। जिस रफ़्तार से हर दिन 10 से 11 लाख बैरल तेल आ रहा है, उससे अगले 12 से 13 दिनों में यह जगह पूरी तरह भर जाएगी। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अगर नाकेबंदी जारी रही, तो ईरान को अपने तेल के कुएं बंद करने पड़ सकते हैं।
M/T नाशा जहाज को क्यों फिर से चालू किया गया?
भंडारण की कमी को पूरा करने के लिए ईरान ने M/T नाशा नाम के एक पुराने जहाज को वापस सेवा में लिया है। यह जहाज करीब 30 साल पुराना है और कई सालों से खाली खड़ा था। अब इसे ‘फ्लोटिंग स्टोरेज’ के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि समुद्र में ही तेल जमा किया जा सके। यह जहाज 1996 में बना था और इस पर अमेरिकी प्रतिबंध लगे हुए हैं।
अमेरिका ने ईरान पर क्या कड़े प्रतिबंध लगाए हैं?
अमेरिका ने ईरान के तेल उद्योग और उसे ढोने वाले जहाजों पर सख्त पाबंदियां लगाई हैं। 16 अप्रैल 2026 को नए प्रतिबंध घोषित किए गए, जो खास तौर पर मोहम्मद होसैन शामखानी के नेटवर्क से जुड़े जहाजों को निशाना बनाते हैं। अमेरिका का मकसद ईरान की कमाई के सबसे बड़े जरिए यानी तेल व्यापार को रोकना है, ताकि उस पर दबाव बढ़ाया जा सके।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| शेष भंडारण क्षमता | 13 मिलियन बैरल |
| दैनिक शुद्ध प्रवाह | 1.0-1.1 मिलियन बैरल |
| भंडारण भरने का समय | 12-13 दिन |
| पुराने जहाज का नाम | M/T नाशा |
| जहाज का निर्माण वर्ष | 1996 |
| अनुमानित निर्यात | 1.45 से 1.60 मिलियन बैरल/दिन |
| नाकेबंदी प्रभावी तिथि | 13 अप्रैल, 2026 |