अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर ऐसी लगाम कसी है कि वहां के मुख्य स्टोरेज सेंटर खार्ग आइलैंड के टैंक अब भरने वाले हैं। 13 अप्रैल से लगी इस नाकेबंदी की वजह से ईरान का कच्चा तेल बाहर नहीं जा पा रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों में खाली डॉक और भरे हुए टैंक साफ़ दिख रहे हैं, जिससे ईरान की आर्थिक स्थिति पर बड़ा असर पड़ा है।

अमेरिका की नाकेबंदी और ईरान को होने वाला नुकसान

US Central Command (CENTCOM) ने बताया कि 13 मई तक 67 जहाजों का रास्ता बदला गया और 4 को बेकार कर दिया गया ताकि वे ईरानी बंदरगाहों तक न पहुँच सकें। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर शांति समझौता नहीं माना गया तो कार्रवाई और कड़ी हो सकती है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इस नाकेबंदी से ईरान को हर दिन करीब 500 मिलियन डॉलर का राजस्व नुकसान हो रहा है।

विवरण आंकड़े/तथ्य
नाकेबंदी की शुरुआत 13 अप्रैल 2026
प्रतिदिन राजस्व हानि 500 मिलियन डॉलर
तेल निर्यात में गिरावट 80 प्रतिशत से अधिक
रास्ता बदले गए जहाज 67
बेकार किए गए जहाज 4
बचा हुआ स्टोरेज 13 मिलियन बैरल

खार्ग आइलैंड के स्टोरेज और सैटेलाइट रिपोर्ट

यूरोपीय सैटेलाइट तस्वीरों में देखा गया कि 8 से 11 मई के बीच खार्ग आइलैंड के पास कोई भी तेल टैंकर प्रस्थान के लिए तैयार नहीं था। 3 मई तक यहां की स्टोरेज क्षमता 74 प्रतिशत थी और अब यह लगभग फुल होने वाली है। Vortexa के डेटा के मुताबिक, अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में ईरान का तेल निर्यात मार्च के मुकाबले 80 प्रतिशत से ज्यादा गिर गया। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने चेतावनी दी कि स्टोरेज फुल होने से ईरान के तेल बुनियादी ढांचे को स्थायी नुकसान पहुँच सकता है।

जहाजों पर हमला और ईरान का जवाब

अमेरिकी सेना ने M/T Sea Star III, M/T Sevda और M/T Hasna जैसे ईरानी जहाजों को रोकने के लिए उनके धुएं वाले पाइपों और पतवार पर सटीक मिसाइलें दागीं। ईरान के सशस्त्र बलों ने इस कार्रवाई को समुद्री डकैती और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया है। ईरान के यूएन दूत आमिर सईद इरावानी ने इन सैन्य हरकतों को शांति समझौते और यूएन चार्टर का उल्लंघन करार दिया है। वहीं, ईरानी सांसदों ने तेल रिसाव के आरोपों को नकारते हुए इसका दोष यूरोपीय टैंकरों पर मढ़ा है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका ने ईरान की नाकेबंदी कब और क्यों शुरू की

अमेरिकी नौसेना ने 13 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजे यह नाकेबंदी शुरू की, क्योंकि इस्लामाबाद में आयोजित शांति वार्ता विफल रही थी।

इस नाकेबंदी का ईरान की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा है

अनुमान है कि ईरान को प्रतिदिन लगभग 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है और उसका तेल निर्यात 80 प्रतिशत तक कम हो गया है।