अमेरिका के नए प्रतिबंधों पर भड़का ईरान, कहा यह सभी देशों के खिलाफ युद्ध की घोषणा है

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ गया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने 22 अगस्त 2026 को यह साफ कहा कि अमेरिका की तरफ से आने वाले नए प्रतिबंध किसी एक देश पर नहीं बल्कि दुनिया के सभी देशों के खिलाफ युद्ध की घोषणा के बराबर हैं। ईरान का कहना है कि यह कदम पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र के नियमों के खिलाफ है। ईरान ने इसे स्वतंत्र देशों पर अपनी मर्जी थोपने वाला और गलत काम करार दिया है जिसका कोई कानूनी आधार नहीं है।
अमेरिका का अब तक का सबसे सख्त प्रतिबंध
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका के ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने 21 अगस्त 2026 को यह ऐलान किया था कि अमेरिका ईरान पर इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने जा रहा है। उन्होंने इस बात को आर्थिक युद्ध और पूरी तरह से अलग-थलग करने वाला कदम बताया। सचिव स्कॉट बेसेंट ने यह भी चेतावनी दी थी कि जो भी देश तेहरान के साथ व्यापार जारी रखेगा उसे बहुत भारी परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा था कि या तो आप हमारे साथ हैं या फिर हमारे खिलाफ हैं। इस पूरे मामले पर वह 24 अगस्त 2026 यानी सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में और भी पूरी जानकारी देने वाले हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी इस अभियान को आर्थिक डी-डे का नाम दिया है और ईरान की अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाले हर देश को परिणाम भुगतने की धमकी दी है।
ईरान का कड़ा रुख और क्षेत्रीय तनाव
अमेरिका की इन चेतावनियों के बाद भी ईरान के अंदरूनी नेतृत्व ने झुकने से साफ मना कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने 21 अगस्त 2026 को यह बयान दिया कि अमेरिका के ये नए प्रतिबंध पूरी तरह से फेल होने वाले हैं। उन्होंने पुराने दबाव वाले अभियानों का हवाला देते हुए कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। इसके अलावा ईरान की सशस्त्र सेनाओं के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल Ali Abdollahi ने भी चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका की तरफ से कोई भी नया खतरा पैदा होता है तो उसका बहुत ही करारा और भयानक जवाब दिया जाएगा। संसद के स्पीकर Mohammad Baqer Qalibaf ने भी अमेरिका और इसराइल पर मानसिक युद्ध लड़ने का आरोप लगाया है, हालांकि उन्होंने देश में चल रही आर्थिक परेशानी को भी स्वीकारा है।
इस बढ़ते तनाव की वजह से खाड़ी इलाकों में हालात बहुत ज्यादा बिगड़ गए हैं। फारस की खाड़ी में होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले तेल के जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है क्योंकि तेहरान की तरफ से बिना अनुमति वाले जहाजों को निशाना बनाने की धमकी दी जा रही है। कतर और पाकिस्तान जैसे देशों के जरिए बातचीत की कोशिशें भी तब कमजोर पड़ गईं जब ईरान के विदेश मंत्रालय ने 17 अगस्त 2026 को यह साफ कर दिया कि समझौते के तहत बातचीत के लिए तय की गई 60 दिन की समय सीमा का अब कोई मतलब नहीं बचा है क्योंकि अमेरिका ने लगातार नियमों का उल्लंघन किया है।