ईरान के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में अमेरिका और इसराइल की सैन्य गतिविधियों को लेकर बड़ी प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने इन देशों की कार्रवाइयों को ‘बिना किसी उकसावे के आक्रामकता’ करार दिया है। ईरान का दावा है कि फारस की खाड़ी में उसके सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों के जवाब में उन्होंने जो कार्रवाई की, वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उनके आत्मरक्षा के अधिकार का हिस्सा है।

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हमले और तनाव का घटनाक्रम

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता @IRIMFA_SPOX ने 12 जुलाई 2026 को जानकारी दी कि यह पूरा मामला 28 फरवरी से शुरू हुआ था। ईरान ने इसे सामान्य सैन्य टकराव मानने से इनकार किया है और इसे अपने संप्रभुता की रक्षा का मामला बताया है। ईरान ने खाड़ी देशों से अपील की है कि वे अपनी ज़मीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई के लिए न होने दें।

फारस की खाड़ी के नाम पर जोर

ईरान ने आधिकारिक तौर पर इस बात पर जोर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमेशा ‘Persian Gulf’ यानी फारस की खाड़ी शब्द का ही इस्तेमाल किया जाए। इसके लिए उन्होंने 18 अगस्त 1994 और 14 मई 1999 के संयुक्त राष्ट्र के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया है। ईरान का कहना है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.