अमेरिका के नए प्रतिबंधों पर ईरान का फूटा गुस्सा, अमरीकी पाबंदियों को बताया आर्थिक आतंकवाद और मानवता के खिलाफ अपराध.

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तनाव एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ गया है जब 20 अगस्त 2026 को ईरान सरकार ने अमेरिका की तरफ से लगाए गए नए आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों पर बहुत तीखी प्रतिक्रिया दी। ईरान ने साफ शब्दों में इन पाबंदियों को 'आर्थिक आतंकवाद' और 'मानवता के खिलाफ अपराध' करार दिया है। इस पूरे मामले पर ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने इन सभी पाबंदियों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि ये नियम सीधे तौर पर आम नागरिकों को निशाना बनाते हैं, लेकिन इससे तेहरान अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता से पीछे हटने वाला नहीं है। ईरानी अधिकारियों का मानना है कि अमेरिका खुद अपने देश के वित्तीय संकट से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे कदम उठा रहा है, क्योंकि अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज $40 ट्रिलियन तक पहुंच चुका है और लगातार ब्याज का बोझ बढ़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ, उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने भी अमरीकी प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि सैन्य मोर्चे पर नाकामी मिलने के बाद अब वॉशिंगटन ने नया आर्थिक युद्ध छेड़ दिया है।
अमेरिका का कड़ा रुख और तेल तस्करी पर शिकंजा
इससे ठीक एक दिन पहले 19 अगस्त 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बहुत बड़े और सख्त आर्थिक अभियान का ऐलान किया था जिसे 'Economic Warfare and Isolation' और 'Economic D-Day' का नाम दिया गया। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने इस योजना की पूरी पुष्टि की और कहा कि ईरान को आर्थिक रूप से पूरी तरह से अलग-थलग करने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इन नए प्रतिबंधों के दायरे में ईरान का तेल smuggling, कैश ट्रांसफर, जहाजों के रजिस्ट्रेशन और फर्जी कंपनियां शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन ने बहुत कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि जो भी वित्तीय संस्थान, देश या कंपनी ईरान की मदद करती हुई पाई जाएगी, उसे इसके बहुत गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। अमेरिका के इस बड़े कदम से दुनिया भर के बाजारों में हलचल मच गई है और हालात तेजी से बदल रहे हैं.
खाड़ी देशों में बढ़ी उथल-पुथल और तेल की कीमतें आसमान पर
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे इस तनाव का असर अब सीधे तौर पर खाड़ी देशों के बाजारों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी साफ दिखने लगा है। खाड़ी क्षेत्र में हालात इतने संवेदनशील हो गए हैं कि 19 अगस्त को संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने ईरान के खिलाफ पूरी तरह से व्यापारिक और वित्तीय प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी। क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अमेरिकी नौसेना का ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर USS George Washington भी 19 अगस्त को मध्य पूर्व पहुंच गया, जिसने USS Abraham Lincoln की जगह ली है। इस बढ़ते तनाव और अनिश्चितता के माहौल के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। 20 अगस्त को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत $92 प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गई, जो पिछले जुलाई महीने के बाद से सबसे ऊंचा स्तर है। इसके अलावा, ईरान के केंद्रीय बैंक ने यह भी जानकारी दी कि उम्मीद के बावजूद उनका एक भी विदेशी फ्रोजन एसेट अभी तक वापस नहीं मिला है, जिससे आने वाले दिनों में आर्थिक संकट और गहराने की आशंका बनी हुई है।