Sea of Oman में तनाव बहुत बढ़ गया है. अमेरिकी सेना ने ईरान के एक व्यापारिक जहाज़ ‘Touska’ को अपने कब्ज़े में ले लिया, जिसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों की तरफ ड्रोन भेज दिए. इस हमले के बाद दोनों देशों के बीच टकराव और गहरा गया है.

📰: NLR India ने पूरे किए 27 साल, कुष्ठ रोग को जड़ से खत्म करने के लिए अब ‘लास्ट माइल’ एक्शन पर जोर

अमेरिकी सेना ने क्यों पकड़ा ईरानी जहाज़?

अमेरिकी सेना ने 19 अप्रैल 2026 को ईरानी जहाज़ Touska को बीच समुद्र में रोक लिया. US Central Command (CENTCOM) का कहना है कि यह जहाज़ अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी का उल्लंघन कर रहा था. राष्ट्रपति Donald Trump ने बताया कि जहाज़ ने बार-बार दी गई चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया, जिसके बाद USS Spruance ने इसके इंजन रूम में गोलियां चलाकर इसे खराब कर दिया और इसे अपनी कस्टडी में ले लिया.

ईरान ने इस कार्रवाई पर क्या प्रतिक्रिया दी?

ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस घटना को “समुद्री डकैती” और “आतंकवादी हमला” बताया है. विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने कहा कि ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी करना युद्ध की घोषणा करने जैसा है. ईरान का दावा है कि यह कार्रवाई 8 अप्रैल 2026 को हुए युद्धविराम समझौते का खुला उल्लंघन है और उन्होंने इस जहाज़ और उसके क्रू को तुरंत छोड़ने की मांग की है.

ड्रोन हमले और मौजूदा हालात क्या हैं?

ईरानी मीडिया और Al Jazeera की रिपोर्ट के मुताबिक, 21 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026 के बीच ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर कई ड्रोन हमले किए. ईरान के सैन्य कमांड ‘Khatam al-Anbiya’ ने साफ कहा है कि उनकी सेना अमेरिका का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है. इस पूरी घटना से Strait of Hormuz के इलाके में सुरक्षा को लेकर डर बढ़ गया है.

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com