ईरान ने इज़राइल के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करते हुए मिसाइलों की एक बड़ी लहर भेजने की घोषणा की है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इसे अपने ‘ट्रू प्रॉमिस 4’ ऑपरेशन का हिस्सा बताया है। 22 मार्च 2026 को हुए इस हमले में इज़राइल के कई शहरों को निशाना बनाया गया, जिससे क्षेत्र में युद्ध की स्थिति और गंभीर हो गई है।

हमले में कितना नुकसान हुआ और कौन से शहर प्रभावित हुए?

ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलें इज़राइल के दक्षिण में स्थित अराद और डिमोना शहरों पर गिरी हैं। इन हमलों में जान-माल का काफी नुकसान हुआ है। मुख्य विवरण इस प्रकार हैं:

  • अराद शहर में मिसाइल गिरने से कम से कम 20 इमारतों को नुकसान पहुंचा है।
  • अराद में 116 और डिमोना में 64 लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है।
  • पिछले 24 घंटों में इज़राइल के अस्पतालों में कुल 303 घायल लोगों को भर्ती किया गया है।
  • इज़राइली सेना के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान अब तक 400 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें दाग चुका है।
  • डिमोना परमाणु अनुसंधान केंद्र के पास भी धमाके सुने गए हैं, हालांकि वहां किसी बड़े खतरे की पुष्टि नहीं हुई है।

सऊदी अरब और अमेरिका का इस पर क्या रुख है?

इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव काफी बढ़ गया है। सऊदी अरब ने स्थिति को देखते हुए अपने यहां से ईरानी दूतावास के कुछ अधिकारियों को वापस भेज दिया है। इसके साथ ही सऊदी अरब ने अपनी सीमा के पास दर्जनों ड्रोनों को मार गिराने की सूचना दी है।

देश या संस्था प्रतिक्रिया और कार्रवाई
अमेरिका ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए 48 घंटे का समय दिया है।
सऊदी अरब ईरानी सैन्य कर्मचारियों को निकाला और ड्रोनों को इंटरसेप्ट किया।
इज़राइल तेहरान और लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर जवाबी हमले शुरू किए।
IAEA परमाणु केंद्रों के पास अधिकतम सैन्य संयम बरतने की अपील की।

ईरान ने धमकी दी है कि यदि उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ, तो वह पूरे मध्य पूर्व में अमेरिका और इज़राइल के इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे एक कठिन शाम बताया है और सभी मोर्चों पर जवाबी कार्रवाई करने की बात कही है। लेबनान की ओर से हिजबुल्लाह के हमलों में भी तेजी देखी गई है जिससे युद्ध का दायरा बढ़ता जा रहा है।