ईरान की लवान रिफाइनरी पर हुए हमले के बाद वहां भारी तबाही मची है. हाल ही में एक वीडियो सामने आया है जिसमें शिडवार आइलैंड के तटों पर तेल फैला हुआ दिख रहा है. इस तेल की वजह से वहां के वन्यजीव सांस नहीं ले पा रहे हैं और फंस गए हैं. यह वीडियो 19 मई 2026 को जारी किया गया.

शिडवार आइलैंड और पर्यावरण का क्या हाल है?

शिडवार आइलैंड एक खास नेचर रिजर्व है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण वेटलैंड माना जाता है. यहाँ 1972 से वन्यजीवों की सुरक्षा की जा रही है और यह समुद्री पक्षियों, खासकर टर्न के लिए प्रजनन का मुख्य केंद्र है. सैटेलाइट तस्वीरों और वीडियो से पता चला है कि रिफाइनरी पर हमले के बाद यहाँ तेल फैल गया. इससे वहां के जानवरों और पक्षियों की हालत बहुत खराब हो गई है और कई जीव दम तोड़ रहे हैं.

रिफाइनरी हमले में कितना नुकसान हुआ?

यह हमला 8 अप्रैल 2026 को हुआ था. नेशनल ईरानी ऑयल रिफाइनिंग एंड डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (NIORDC) ने इसे दुश्मनों का कायरतापूर्ण हमला बताया. इस हमले में तेल उद्योग के तीन कर्मचारी मारे गए. डिप्टी ऑयल मिनिस्टर मोहम्मद-सादेग अज़ीमिफ़र ने बताया कि रिफाइनरी के कुछ हिस्सों को 10 दिनों में दोबारा चालू करने की उम्मीद थी और एक से दो महीने में इसे पुरानी क्षमता के 70 से 80 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया.

हमले के पीछे किसका हाथ बताया जा रहा है?

ईरान ने इस हमले के लिए अमेरिका और इजराइल को जिम्मेदार ठहराया है. कुछ ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का नाम भी लिया गया, हालांकि अमीराती अधिकारियों ने इस बात को नहीं माना. दूसरी तरफ, इजराइल ने इन आरोपों से इनकार किया है और अमेरिका के सेंट्रल कमांड ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है. इसी बीच, 19 मई को UAE ने पिछले 48 घंटों में छह हमलावर ड्रोन पकड़ने की बात कही है, जो उनके नागरिक इलाकों को निशाना बना रहे थे.

Frequently Asked Questions (FAQs)

लवान रिफाइनरी पर हमला कब हुआ था?

लवान रिफाइनरी पर हमला 8 अप्रैल 2026 को हुआ था, जिसके बाद शिडवार आइलैंड के आसपास तेल फैल गया.

शिडवार आइलैंड की क्या खासियत है?

शिडवार आइलैंड एक निर्जन द्वीप और प्रकृति रिजर्व है, जिसे रामसर कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व का वेटलैंड माना जाता है.