ईरान के नए सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei ने खाड़ी देशों के लिए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान और उसके पड़ोसियों का भाग्य और भविष्य एक जैसा है। यह बात उन्होंने ‘नेशनल पर्शियन गल्फ डे’ के मौके पर कही, जहां उन्होंने क्षेत्र से विदेशी ताकतों को हटाने की बात भी की।

ℹ️: ईरान के सुप्रीम लीडर का बड़ा ऐलान, Strait of Hormuz की घेराबंदी होगी खत्म, अमेरिका को दी सख्त चेतावनी

Mojtaba Khamenei ने क्या कहा और अमेरिका को क्या चेतावनी दी?

ईरानी नेता Mojtaba Khamenei ने 30 अप्रैल 2026 को कहा कि ईरान का अपने पड़ोसियों के साथ एक साझा भाग्य है। उन्होंने एक ऐसे विजन की बात की जिसमें पर्शियन गल्फ क्षेत्र अमेरिका के बिना हो। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि जिन विदेशियों के मन में लालच और द्वेष है, उनकी जगह इस क्षेत्र में नहीं बल्कि समुद्र की गहराइयों में होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि Strait of Hormuz के मैनेजमेंट में अब एक नया दौर शुरू होगा।

GCC देशों की क्या तैयारी है और जेद्दा बैठक में क्या हुआ?

ईरान के बयानों और हालिया तनाव के बीच GCC देशों ने अपनी रणनीति तैयार की है। 28 अप्रैल 2026 को जेद्दा में एक सलाहकार बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता सऊदी क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman ने की। इस बैठक में उन ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों पर चर्चा की गई जो 28 फरवरी 2026 से हो रहे हैं। सभी सदस्य देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एकजुट होकर कदम उठाने और आपसी तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया।

ईरान और सऊदी अरब के बीच संबंधों की वर्तमान स्थिति क्या है?

  • 9 अप्रैल 2026: ईरान और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों के बीच फोन पर बात हुई ताकि द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता को सुधारा जा सके।
  • 8 अप्रैल 2026: अमेरिका और ईरान के बीच एक ceasefire यानी युद्धविराम शुरू हुआ, लेकिन अभी तक कोई स्थायी समझौता नहीं हो पाया है।
  • 11 अप्रैल 2026: Mojtaba Khamenei ने अपने पड़ोसी देशों से अपील की थी कि वे अमेरिका जैसी बाहरी ताकतों से दूरी बना लें।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Mojtaba Khamenei ने Gulf देशों को लेकर क्या बयान दिया?

उन्होंने कहा कि ईरान और Gulf देशों का भाग्य एक है और इस क्षेत्र में अमेरिका जैसी विदेशी ताकतों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

GCC देशों ने ईरान के हमलों पर क्या कदम उठाया?

28 अप्रैल 2026 को जेद्दा में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों से निपटने की रणनीति बनाई गई।