ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई ने 9 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि ईरान जंग की शुरुआत नहीं करना चाहता और न ही इसके पक्ष में है, लेकिन अपने जायज हक को वह किसी भी हाल में नहीं छोड़ेगा। उन्होंने पूरे ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ यानी अपने सहयोगी संगठनों को एक एकजुट इकाई बताया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में इसराइल और ईरान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है।

ईरान के नेताओं और सरकारी संस्थाओं का ताज़ा रुख

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने सोशल मीडिया पर कहा कि इसराइली हमलों ने शांति वार्ता को बेमानी बना दिया है। उनका कहना है कि ईरान अपने हाथ ट्रिगर पर रखे हुए है और वह लेबनान के लोगों का साथ कभी नहीं छोड़ेगा। इसके साथ ही ईरान ने स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के मैनेजमेंट को लेकर नए चरण में प्रवेश करने की घोषणा की है, जिससे वैश्विक व्यापार और तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

  • अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई: ईरान जंग नहीं चाहता लेकिन अधिकारों से समझौता भी नहीं करेगा।
  • राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन: बातचीत का मतलब खत्म हो गया है, सेना अलर्ट पर है।
  • मोहम्मद बागेर गालिबाफ: युद्धविराम उल्लंघन की भारी कीमत चुकानी होगी।
  • परमाणु एजेंसी: यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पर कोई पाबंदी नहीं मानी जाएगी।

यमन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की इस पर प्रतिक्रिया

यमन के हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने ईरान और लेबनान के समर्थन में सीधे तौर पर मैदान में उतरने की धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अगर इसराइल ने लेबनान पर हमले नहीं रोके तो यमन चुप नहीं बैठेगा। दूसरी तरफ, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शांति समझौते को लेकर अब भी उम्मीद जता रहे हैं, जबकि अमेरिकी रक्षा विभाग का दावा है कि उन्होंने ईरान की सैन्य ताकत को बहुत नुकसान पहुँचाया है।

पक्ष मुख्य बयान और अपडेट
यमन (हूती) लेबनान पर हमले हुए तो सीधे सैन्य हस्तक्षेप करेंगे।
पाकिस्तान इस्लामाबाद में शनिवार को शांति वार्ता की कोशिश की जाएगी।
चीन लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने और शांति की अपील की।
इसराइल लेबनान में भारी हवाई हमले किए, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान गई।
ईरान काउंसिल अमेरिका और इसराइल की सैन्य ताकत को बर्बाद करने का दावा किया।