ईरान के अंदरूनी हालात काफी खराब नजर आ रहे हैं. अमेरिका के साथ होने वाली बातचीत को लेकर वहां की सरकार के बड़े नेताओं के बीच भारी मतभेद हो गया है. कुछ नेता झुकने को तैयार हैं तो कुछ इसे देश की हार मान रहे हैं. इस खींचतान की वजह से अब समझौते की राह और मुश्किल हो गई है.
बातचीत में क्या है असली विवाद?
अमेरिका की मांग है कि ईरान अगले 20 साल तक यूरेनियम बनाना बंद कर दे. लेकिन ईरान के कट्टरपंथी नेता अहमद वहिदी और उनके समर्थक इस बात के सख्त खिलाफ हैं. उनका मानना है कि यूरेनियम बनाना ईरान का हक है और इस पर कोई समझौता नहीं होगा. दूसरी तरफ, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसदीय अध्यक्ष गालिबाफ बातचीत के जरिए हल निकालना चाहते हैं.
पावर की लड़ाई और नेताओं की आपसी खींचतान
खबरों के मुताबिक, पूर्व सुप्रीम लीडर के बेटे मुजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हैं, जिससे देश में एक बड़ा खालीपन आ गया है. अब कोई ऐसा बड़ा चेहरा नहीं बचा जो दोनों गुटों के बीच बीच-बचाव कर सके. इसी बीच महमूद नबवियन जैसे कट्टर नेताओं ने गालिबाफ की आलोचना की और कहा कि परमाणु मुद्दे पर बात करना एक बड़ी गलती थी.
इस्लामाबाद में बैठक और खाड़ी देशों का रुख
ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधि बातचीत के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद जा रहे हैं. हालांकि, ईरान की सरकारी मीडिया ने इन बातों से इनकार किया है. सऊदी अरब और UAE इस पूरे मामले पर नजर रख रहे हैं. इन देशों का मानना है कि जल्दबाजी में किया गया कोई भी समझौता इलाके की शांति के लिए सही नहीं होगा और वे ईरान पर दबाव बनाए रखना चाहते हैं.