ईरान के भीतर मची आंतरिक खींचतान और बढ़ती क्षेत्रीय तनाव ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है। 16 जुलाई 2026 को पाकिस्तानी रक्षा विश्लेषक Muhammad Ali ने बताया कि ईरान में फैसले अब सीधे तौर पर सेना और IRGC के हाथों में केंद्रित हो गए हैं, जिससे वहां की सरकार के अन्य नेताओं और सैन्य अधिकारियों के बीच तालमेल कम होता जा रहा है।

पाकिस्तान का रुख और ईरान का आंतरिक संकट

यमन के Houthi विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर किए गए हमलों के बाद से पूरा इलाका तनाव की स्थिति में है। इस तनाव की वजह से ईरान और अमेरिका के बीच चल रही शांति वार्ता भी प्रभावित हुई है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता Tahir Andrabi ने कहा कि Islamabad Memorandum of Understanding (MoU), जो पिछले महीने अमेरिका और ईरान के बीच हुआ था, फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है। तनाव को देखते हुए ईरान के आंतरिक मंत्री Eskandar Momeni का पाकिस्तान दौरा भी तय समय से दो दिन देरी से हुआ।

जनता में गुस्सा और कड़े रुख की खबरें

ईरान की आंतरिक स्थिति भी बेहद गंभीर है। एक गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार, वहां नौ में से दस लोग बदलाव चाहते हैं और जनता में भारी नाराजगी है। वहीं, ईरान के धर्मगुरु Alireza Arafi ने 16 जुलाई को एक बयान में कहा कि अमेरिका के साथ अब और बातचीत नहीं होनी चाहिए, क्योंकि राष्ट्रपति Trump ने बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुँचाने की धमकी दी है। इसके अलावा, ईरान में लगभग 1,00,000 लोगों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें कट्टरपंथी नेताओं से दक्षिण में युद्ध क्षेत्रों का दौरा करने की मांग की गई है ताकि वे वहां के हालात को समझ सकें।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com