ईरान और लेबनान के संसद अध्यक्षों ने अमेरिका पर दबाव बनाया है कि वह इसराइल को युद्ध रोकने के लिए मजबूर करे। दोनों देशों का कहना है कि अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय ताकतों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इसराइल लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई तुरंत बंद करे और वहां के गांवों का विनाश रोके।
ईरान के संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf और लेबनान के संसद अध्यक्ष Nabih Berri ने एक बातचीत के दौरान इस बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को Tehran-Washington के बीच हुए हालिया समझौते (MoU) की शर्तों को लागू करवाना चाहिए। इस समझौते के तहत रविवार रात से सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान खत्म होने थे और ईरान के खिलाफ लगी समुद्री नाकाबंदी को भी तुरंत हटाया जाना था।
समझौते और आधिकारिक बयान
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने भी पुष्टि की है कि अमेरिका के साथ हुई डील के अनुसार सैन्य ऑपरेशन बंद होने चाहिए थे। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने चेतावनी दी है कि अगर इसराइल ने कब्जा जारी रखा, तो यह अमेरिका के साथ हुए समझौते का उल्लंघन माना जाएगा।
लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने इस मामले में अपनी स्थिति साफ की है। उन्होंने कहा कि लेबनान अपनी बातचीत स्वतंत्र रूप से करेगा और युद्धविराम, इसराइली सैनिकों की वापसी और दक्षिण लेबनान की सुरक्षा से जुड़े फैसलों में मुख्य भूमिका निभाएगा।
इसराइल का रुख और अन्य अपडेट
एक तरफ जहां ईरान और लेबनान समझौते की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इसराइल की सेना (IDF) ने 18 जून 2026 को एक नया नक्शा जारी किया। इस नक्शे में दक्षिण लेबनान में 10 किलोमीटर गहरा सुरक्षा क्षेत्र दिखाया गया है और यह साफ किया गया है कि वे फिलहाल इस इलाके से पीछे नहीं हटेंगे।
- हिजबुल्लाह प्रमुख Naim Qassem ने ईरान और अमेरिका के बीच की इस समझ को एक बड़ी जीत और अहम मोड़ बताया है।
- रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान और अमेरिका की इस डील से लेबनान में हिजबुल्लाह की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति और मजबूत हो सकती है।