Iran News: ईरान की सरकारी मीडिया ने जारी किया नया वीडियो, अमेरिका के बंकर-बस्टर हमलों से तबाह हुई इमारत.

Nura Basta25 August 20262 min read68 viewsWorld
Iran News: ईरान की सरकारी मीडिया ने जारी किया नया वीडियो, अमेरिका के बंकर-बस्टर हमलों से तबाह हुई इमारत.

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRRNA ने हाल ही में एक नया वीडियो जारी किया है, जिसमें अमेरिका के घातक हमलों का बड़ा सच सामने आया है। इस वीडियो में 25 अगस्त 2026 को अमेरिकी बंकर-बस्टर मिसाइलों द्वारा इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान ब्रॉडकास्टिंग यानी IRIB की इमारतों पर किए गए हमलों के निशान साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं। यह भयानक हमले उस 40-दिवसीय युद्ध के दौरान हुए थे, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका और इसराइल के बीच हुई थी। इस संघर्ष ने पूरे देश के बुनियादी ढांचे को बुरी तरह से हिला कर रख दिया था और आम जनजीवन पर इसका गहरा असर पड़ा था।

IRIB प्रमुख ने दी जानकारी

IRIB के प्रमुख पयमान जेबेली ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दी कि इस पूरे संघर्ष के दौरान देश भर में सरकारी प्रसारक की 50 से अधिक सुविधाओं को निशाना बनाया गया था। जेबेली ने पुष्टि की कि तेहरान में मौजूद ऐतिहासिक 'ग्लास बिल्डिंग' पर दूसरी बार बमबारी की गई। ताजा हमलों की वजह से इस इमारत की दो से तीन मंजिलें पूरी तरह से ढह गईं और एक मजबूत कंक्रीट की दीवार भी मलबे में तब्दील हो गई। आपको बता दें कि इसी इमारत को इससे पहले जून 2025 में एक 12-दिवसीय युद्ध के दौरान भी निशाना बनाया गया था और भारी नुकसान पहुंचाया गया था।

रुके हुए पुनर्निर्माण कार्य और आर्थिक संकट

जेबेली ने आगे बताया कि इस प्रसिद्ध 'ग्लास बिल्डिंग' की मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम पहले से तय था, लेकिन दोबारा शुरू हुई दुश्मनी के कारण इसे फिलहाल टाल दिया गया। अब उम्मीद जताई जा रही है कि हालात सामान्य होने के बाद ही इस पर दोबारा काम शुरू किया जाएगा। इसके अलावा, 24 अगस्त 2026 की रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई थी कि इस 40-दिवसीय संघर्ष ने ईरान की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था को और ज्यादा बदतर बना दिया है। साल 2026 की शुरुआत में ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी बंकर-बस्टर बमों को अपने कब्जे में लेने का दावा किया था। उन्होंने खास तौर पर GBU-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर की पहचान की थी, जिसे आमतौर पर B-2 विमानों के जरिए गिराया जाता है। ईरानी इंजीनियरों ने इस विदेशी तकनीक को रिवर्स-इंजीनियर करने यानी वैसी ही तकनीक खुद विकसित करने के प्रयास भी शुरू कर दिए हैं।

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