ईरान की बढ़ती सैन्य ताकत ने अब गल्फ देशों की नींद उड़ा दी है. इन देशों को अब लगने लगा है कि अमेरिका का सुरक्षा कवच उनके काम नहीं आएगा. ईरान की मिसाइलों और ड्रोन के बढ़ते असर से पूरे इलाके का सुरक्षा समीकरण बदल गया है.

तेहरान की IRNA न्यूज़ एजेंसी ने 2 जुलाई 2026 को बताया कि ईरान की ताकत की वजह से क्षेत्रीय देशों का अमेरिका पर से भरोसा कम हो रहा है. गल्फ देशों को अब शक है कि क्या मुश्किल समय में अमेरिका उन्हें सही सुरक्षा दे पाएगा.

ईरान का सख्त रुख

ईरान के एक्टिंग डिफेंस मिनिस्टर Brig. Gen. Majid Ebn al-Reza ने 1 जुलाई 2026 को साफ कहा कि उनके मिसाइल और ड्रोन प्रोग्राम पर कोई समझौता नहीं होगा. उन्होंने इसे देश की सुरक्षा के लिए “रेड लाइन” बताया और कहा कि बाहरी दबाव के बावजूद वे अपने डिफेंस प्रोग्राम को बढ़ाते रहेंगे.

हाल ही में हुए 40 दिनों के अमेरिका-इसराइल संघर्ष में ईरान ने अपनी मिसाइलों और ड्रोन का जमकर इस्तेमाल किया. ईरान का दावा है कि उन्होंने अमेरिकी और इसराइली सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए और उनके आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम को नाकाम कर दिया.

ईरान अब अपनी मिसाइलों की रेंज बढ़ा रहा है. मार्च 2026 में ईरान ने करीब 3,700 किलोमीटर दूर Diego Garcia में अमेरिकी सैन्य बेस पर हमला करने की कोशिश की थी, जो अब तक का उनका सबसे दूर का हमला था.

Strait of Hormuz पर विवाद

ईरान के Khatam al-Anbiya सेंट्रल हेडक्वार्टर ने 2 जुलाई 2026 को चेतावनी दी कि Strait of Hormuz के ऊपर अमेरिका की हवाई गतिविधियां बंद होनी चाहिए. ईरान इस इलाके को अपनी संप्रभु जमीन मानता है और कहता है कि सभी कमर्शियल और तेल जहाजों को उनके बताए रास्ते से ही जाना होगा.

ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर Kazem Gharibabadi ने बहरीन में हुए अमेरिकी सुरक्षा सम्मेलन की आलोचना की. उन्होंने कहा कि हॉर्मुज का नियंत्रण ईरान के पास है, न कि CENTCOM के पास. उनके मुताबिक क्षेत्रीय सुरक्षा का इंतजाम पड़ोसी देशों को खुद करना चाहिए, न कि अमेरिका के भरोसे रहना चाहिए.

गल्फ देशों की चिंता और बदलती सोच

जून 2025 में Al Udeid एयर बेस पर हुए हमले और उसके बाद की घटनाओं से गल्फ देशों की सोच बदल गई है. उन्हें महसूस हुआ कि हमलों के समय अमेरिका ने उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी और उन्हें खुद अपनी रक्षा करनी पड़ी. इससे यह धारणा बनी है कि अमेरिका अब पहले जैसा भरोसेमंद सुरक्षा देने वाला साथी नहीं रहा.

विशेषज्ञों का मानना है कि फरवरी 2026 से हो रहे प्रॉक्सी हमलों ने अमेरिका के सुरक्षा कवच के भ्रम को तोड़ दिया है. अब गल्फ देश केवल वॉशिंगटन के भरोसे नहीं रहना चाहते और वे आपस में और ईरान के साथ सीधे बात करके अपनी सुरक्षा तय करने की कोशिश कर रहे हैं.

अमेरिका और सहयोगियों का जवाब

दूसरी तरफ, अमेरिका के CENTCOM कमांडर Adm. Brad Cooper ने बहरीन में 12 देशों के सैन्य अधिकारियों के साथ मीटिंग की. उन्होंने भरोसा दिलाया कि अमेरिका अभी भी इलाके की स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है और उनके पास दुनिया का सबसे आधुनिक एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम है.

25 जून 2026 को अमेरिका और गल्फ देशों ने एक साझा बयान जारी किया. इसमें ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने और उसकी मिसाइल और ड्रोन प्रोग्राम पर लगाम लगाने की बात कही गई. साथ ही उन्होंने Strait of Hormuz पर ईरान द्वारा किसी भी तरह के टोल या नियंत्रण लगाने की कोशिशों को खारिज कर दिया.