ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने 29 मार्च 2026 को एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump को लेकर कड़ा रुख अपनाया गया है। ईरान के सैन्य प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा है कि ट्रंप अब इजरायली शासन (Zionist regime) के हाथों के मोहरे बन चुके हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ रहा है और ईरान के सैन्य प्रवक्ता के साथ-साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी अमेरिका और इजरायल के खिलाफ तीखी बयानबाजी कर रहे हैं।

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ईरानी सेना के बयान और क्षेत्र की मौजूदा स्थिति

ईरान की ओर से जारी बयानों में अमेरिका की हर चाल पर कड़ी नजर रखने की बात कही गई है। सेना के प्रवक्ता ने ट्रंप के हालिया बयानों को मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा बताया है। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच कुछ मुख्य बातें सामने आई हैं:

  • ईरान की संसद के अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने अमेरिकी जमीनी हमले की स्थिति में भारी नुकसान पहुंचाने की चेतावनी दी है।
  • Iran’s Revolutionary Guard (IRGC) ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को लेकर सख्त अल्टीमेटम जारी किया है।
  • अमेरिकी सेना के USS Tripoli जहाज के 3,500 सैनिकों के साथ मिडिल ईस्ट पहुंचने की खबर है।
  • इजरायली सेना ने ईरान के अंदर कई मिसाइल और हथियारों के उत्पादन केंद्रों पर हमले करने का दावा किया है।

खाड़ी देशों की चिंता और शांति के प्रयास

क्षेत्र में बढ़ते युद्ध के खतरे को देखते हुए कई देश राजनयिक समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और सऊदी अरब के विदेश मंत्री इस्लामाबाद में बातचीत कर रहे हैं ताकि इस संघर्ष को बढ़ने से रोका जा सके। खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले प्रवासियों और व्यापारिक गतिविधियों पर भी इसके असर की आशंका जताई जा रही है क्योंकि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

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