खाड़ी क्षेत्र में तनाव एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है क्योंकि ईरान की सेना ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को लेकर एक सख्त चेतावनी जारी की है। ईरान के सैन्य अधिकारियों का कहना है कि अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास स्थित उनके द्वीपों पर दोबारा हमला किया गया, तो वे रास अल-खैमाह को अपना निशाना बनाएंगे। ईरान का दावा है कि उनके द्वीपों पर होने वाले हमलों के लिए यूएई की धरती का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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ईरान ने क्यों दी रास अल-खैमाह को निशाना बनाने की धमकी?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में जानकारी दी थी कि खर्ग (Kharg) और अबू मूसा (Abu Musa) द्वीपों पर जो हमले हुए, वे रास अल-खैमाह और दुबई के पास स्थित अमेरिकी ठिकानों से किए गए थे। ईरान ने साफ किया है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

  • ईरान का आरोप है कि हमलों में HIMARS रॉकेट सिस्टम का इस्तेमाल किया गया था।
  • ईरान की सेना ने चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसे हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
  • सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही गई है ताकि आम लोगों को नुकसान न हो।
  • यूएई के बंदरगाहों के पास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की खबरें भी सामने आई हैं।

खाड़ी में रहने वाले प्रवासियों और व्यापार पर क्या होगा असर?

इस तनावपूर्ण स्थिति का असर सीधे तौर पर वहां रहने वाले भारतीय और अन्य विदेशी प्रवासियों पर पड़ सकता है। यूएई में लाखों की संख्या में भारतीय काम करते हैं, जिनके लिए सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। खाड़ी के देशों के बीच इस तरह की बयानबाजी से समुद्री व्यापार और उड़ानों पर भी असर पड़ने की संभावना रहती है।

प्रभावित क्षेत्र संभावित असर
रास अल-खैमाह सैन्य चेतावनी के कारण हाई अलर्ट
जेबेल अली पोर्ट व्यापारिक गतिविधियों में सावधानी
प्रवासी मजदूर कामकाज और सुरक्षा को लेकर चिंता

खातम अल-अंबिया मुख्यालय की ओर से क्या कहा गया?

ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने पहले भी एक चेतावनी जारी की थी जिसमें यूएई के उन बंदरगाहों को खाली करने की बात कही गई थी जहाँ अमेरिकी सैन्य संपत्ति मौजूद है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उनकी जवाबी कार्रवाई केवल सैन्य ठिकानों तक ही सीमित रहेगी। फिलहाल दुबई और रास अल-खैमाह में स्थिति सामान्य है लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पूरी स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। प्रवासियों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक सूत्रों से मिली खबरों पर ही भरोसा करें।