ईरान के मीनाब शहर में एक लड़कियों के प्राइमरी स्कूल पर हुए हमले ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। इस हमले में 120 बच्चों समेत 156 लोगों की जान चली गई। अब यूरोपीय संसद के सदस्य मिलान उहरिक ने इस घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है और इसे एक सोची-समझी वार क्राइम बताया है।

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यूरोपीय नेता ने क्यों की जांच की मांग?

स्लोवाकिया के MEP मिलान उहरिक ने ब्रुसेल्स में ईरानी दूतावास के बाहर एक शोक सभा में हिस्सा लिया। उन्होंने शजारेह तय्येबा प्राइमरी स्कूल पर हुए हमले की कड़ी निंदा की। उहरिक का कहना है कि यूरोपीय देशों और संस्थानों ने इस मामले में चुप्पी साधी हुई है क्योंकि वे अमेरिका और इसराइल की नीतियों के खिलाफ नहीं जाना चाहते। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की बिना किसी भेदभाव के तुरंत जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों को सजा मिल सके।

हमले में कितना नुकसान हुआ और कौन है जिम्मेदार?

यह हमला 28 फरवरी 2026 को हुआ था, जिसे 2026 ईरान युद्ध का पहला दिन माना जाता है। इस मिसाइल हमले में 120 छात्राएं और 26 शिक्षक मारे गए। अमेरिकी सेना की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि इस हमले के लिए अमेरिकी सेना जिम्मेदार हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना के पास पुरानी जानकारी थी कि वह स्कूल पहले एक मिलिट्री बेस हुआ करता था। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाएई ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का बड़ा उल्लंघन और जघन्य अपराध बताया है।

संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संस्थाओं का क्या कहना है?

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने अमेरिका से जल्द से जल्द जांच पूरी कर नतीजे सार्वजनिक करने को कहा है। UNESCO ने इस बमबारी को मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया और कहा कि शिक्षण संस्थानों और बच्चों की सुरक्षा जरूरी है। UNICEF और Human Rights Watch ने भी इस दुखद घटना पर जवाबदेही तय करने की मांग की है। नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला युसूफजई ने भी इस हिंसा की निंदा करते हुए न्याय की मांग की है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान के मीनाब स्कूल हमले में कितने लोगों की जान गई?

इस हमले में कुल 156 लोगों की मौत हुई, जिसमें 120 छात्राएं और 26 शिक्षक शामिल थे।

इस हमले के लिए किसे जिम्मेदार माना जा रहा है?

अमेरिकी सेना की शुरुआती जांच के अनुसार, अमेरिकी सेना जिम्मेदार हो सकती है क्योंकि उनके पास उस जगह की पुरानी जानकारी थी कि वह स्कूल पहले मिलिट्री बेस था।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com