ईरान के मिनाब शहर में अमेरिकी हमले से तबाह हुआ एक स्कूल अब देश की यादों में हमेशा के लिए दर्ज होगा। सरकार ने ऐलान किया है कि इस स्कूल को नेशनल साइट घोषित किया जाएगा। यह वही जगह है जहां युद्ध की वजह से मासूम बच्चों ने अपनी जान गंवाई थी और अब इसे एक स्मारक के रूप में सहेजा जाएगा।
👉: UAE में ड्रग तस्करी करने वाले 13 लोग गिरफ्तार, विदेश से चल रहा था पूरा खेल, मास्टरमाइंड भी पकड़ा गया।
मिनाब स्कूल पर हमला और जान-माल का भारी नुकसान
यह घटना 28 फरवरी 2026 को हुई थी जब 2026 के ईरान युद्ध के पहले दिन मिनाब के Shajareh Tayyebeh गर्ल्स एलिमेंट्री स्कूल पर हमला हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक इस हमले में टोमाहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया था और इसे ‘ट्रिपल-टैप मिसाइल स्ट्राइक’ कहा गया। मिनाब पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ऑफिस के अनुसार इस हमले में 156 आम नागरिक मारे गए, जिनमें 120 स्कूली बच्चे थे। कुछ अन्य रिपोर्टों में मरने वालों की संख्या 170 से 175 के बीच बताई गई है।
अंतरराष्ट्रीय जांच और अमेरिका का क्या कहना है
Amnesty International की जांच में पाया गया कि स्कूल को सीधे तौर पर सटीक मिसाइलों से निशाना बनाया गया था और अमेरिकी सेना नागरिकों को बचाने के लिए जरूरी सावधानी बरतने में नाकाम रही। UN Human Rights Council ने 27 मार्च 2026 को इस हमले की सर्वसम्मति से निंदा की थी। अमेरिकी सेना ने अपनी शुरुआती जांच में स्वीकार किया कि इस हमले के पीछे उनके सैनिकों का हाथ होने की संभावना है। हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio और रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने स्पष्ट किया कि अमेरिका जानबूझकर किसी स्कूल या नागरिकों को टारगेट नहीं करता है।
नेशनल साइट घोषित करने का फैसला और वर्तमान स्थिति
29 अप्रैल 2026 को एक सरकारी अधिकारी ने IRNA न्यूज एजेंसी के जरिए बताया कि इस स्कूल को नेशनल साइट बनाया जाएगा। इससे पहले 7 अप्रैल 2026 को इस खूनी संघर्ष में युद्धविराम (ceasefire) हो चुका है। UN के मानवाधिकार उच्चायुक्त Volker Türk ने इस हमले को बच्चों पर युद्ध के प्रभाव का एक चौंकाने वाला उदाहरण बताया था, जबकि UNESCO ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की थी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मिनाब स्कूल पर हमला कब हुआ था और इसमें कितना नुकसान हुआ
यह हमला 28 फरवरी 2026 को हुआ था। इसमें टोमाहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया जिससे 156 नागरिकों की मौत हुई, जिनमें 120 मासूम बच्चे शामिल थे।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इस हमले पर क्या कहा
UN Human Rights Council और UNESCO ने इस हमले की निंदा की। Amnesty International ने अपनी जांच में पाया कि यह हमला सटीक मिसाइलों से किया गया था और यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन था।