ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने इज़राइल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलों की 74वीं लहर के साथ बड़ा हमला किया है। यह कार्रवाई रविवार दोपहर को की गई जिसे ऑपरेशन ‘ट्रू प्रॉमिस-4’ का हिस्सा बताया गया है। ईरान ने इस हमले के लिए कादर और खैबर-शेकन जैसी आधुनिक मिसाइलों का उपयोग किया है। यह हमला हाल के समय में बढ़ रहे क्षेत्रीय तनाव का नतीजा है।

किन मुख्य ठिकानों को बनाया गया निशाना

ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार हमले में सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी Prince Sultan Air Base को निशाना बनाया गया है। इसके अलावा बहरीन में मौजूद US Fifth Fleet के ठिकानों पर भी मिसाइलें दागी गई हैं। इज़राइल के मध्य और दक्षिणी हिस्सों जैसे Tel Aviv और Holon में भी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही गई है। इस हमले से खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर हलचल तेज हो गई है।

मिसाइल हमले की क्या है असली वजह

यह हमला अयातुल्ला खामेनेई की हत्या और ईरान पर हुए हमलों के जवाब में किया गया है। IRGC ने इसे 1982 के शहीदों को समर्पित किया है। फरवरी 2026 से ही ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच तनाव बना हुआ है। इससे पहले भी 20 और 21 मार्च को मिसाइल हमले किए गए थे। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों और अन्य लोगों के लिए सुरक्षा की स्थिति पर नज़र रखना ज़रूरी है।

Sushma Kumari

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